30.4 C
Mumbai
Thursday, October 8, 2026
होमदेश दुनियारियल एस्टेट पारदर्शिता में भारत की बड़ी छलांग, वैश्विक रैंकिंग में 26वें...

रियल एस्टेट पारदर्शिता में भारत की बड़ी छलांग, वैश्विक रैंकिंग में 26वें स्थान पर!

जेएलएल की ग्लोबल रियल एस्टेट ट्रांसपेरेंसी इंडेक्स (जीआरईटीआई) रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रगति के साथ भारत "ट्रांसपेरेंट" श्रेणी के मध्य स्तर में पहुंच गया है| 

Google News Follow

Related

भारत ने वैश्विक रियल एस्टेट पारदर्शिता सूचकांक में पांच स्थानों की छलांग लगाते हुए 26वां स्थान हासिल किया है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत दुनिया के सबसे अधिक सुधार करने वाले पांच बाजारों में शामिल हो गया है और एशिया-प्रशांत क्षेत्र का सबसे बड़ा सुधारक देश बनकर उभरा है।

जेएलएल की ग्लोबल रियल एस्टेट ट्रांसपेरेंसी इंडेक्स (जीआरईटीआई) रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रगति के साथ भारत “ट्रांसपेरेंट” श्रेणी के मध्य स्तर में पहुंच गया है, जो नियामकीय ढांचे, लेनदेन प्रक्रियाओं और स्थिरता संबंधी मानकों में लगातार हुई प्रगति का परिणाम है।

जेएलएल इंडिया की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) राधा धीर ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में भारत ने वैश्विक स्तर पर चौथा और पिछले 20 वर्षों में तीसरा सबसे बड़ा सुधार दर्ज किया है। उन्होंने कहा कि भारत अब दुनिया के सबसे पारदर्शी बाजारों के बराबर पहुंचने और “हाइली ट्रांसपेरेंट” श्रेणी में प्रवेश करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, पारदर्शिता में सुधार के साथ-साथ भारत में निवेश गतिविधियों में भी रिकॉर्ड वृद्धि देखने को मिली है। वर्ष 2025 में निजी इक्विटी निवेश बढ़कर 10.5 अरब डॉलर पहुंच गया, जो सालाना आधार पर 17 प्रतिशत अधिक था। वहीं, 2026 की पहली छमाही में यह निवेश 4.3 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 25 प्रतिशत ज्यादा है।

भारत का ऑफिस आरईआईटी बाजार भी तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2024 में जहां इसका आकार 104 मिलियन वर्ग फुट था, वहीं 2026 में यह बढ़कर 164 मिलियन वर्ग फुट तक पहुंच गया। रिपोर्ट के अनुसार, देश के लगभग आधे ग्रेड-ए ऑफिस स्टॉक अब आरईआईटी के लिए उपयुक्त माने जा रहे हैं।

भारत ने सबसे मजबूत सुधार नियामकीय और कानूनी मानकों के क्षेत्र में दर्ज किया। इस श्रेणी में देश की रैंकिंग 37वें स्थान से बढ़कर 19वें स्थान पर पहुंच गई। इसके पीछे रेरा (आरईआरए) का परिपक्व होना, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नियमों में उदारीकरण और भूमि अभिलेखों का डिजिटलीकरण प्रमुख कारक रहे हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की डेटा सेंटर क्षमता वर्ष 2029 तक 1.6 गीगावाट से बढ़कर 6 गीगावाट होने का अनुमान है। इसके लिए करीब 110 अरब डॉलर के निवेश की आवश्यकता होगी। वैश्विक हाइपरस्केलर कंपनियां एआई-तैयार डेटा सेंटर सुविधाओं के लिए 50 अरब डॉलर से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धता जता चुकी हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, बीएसई रियल्टी इंडेक्स और इंडिया आरईआईटी इंडेक्स निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण बेंचमार्क बन चुके हैं। वहीं, आरईआईटी और सूचीबद्ध फ्लेक्सिबल स्पेस ऑपरेटरों में तिमाही वित्तीय रिपोर्टिंग और वार्षिक खुलासा मानकों के मजबूत होने से पूरे क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ी है।

लेनदेन प्रक्रिया के मामले में भी भारत ने अपनी मजबूत स्थिति बरकरार रखी है। इस पैमाने पर भारत वैश्विक स्तर पर 10वें और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में तीसरे स्थान पर रहा।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वाणिज्यिक रियल एस्टेट वित्तपोषण से जुड़े आंकड़ों की उपलब्धता और विश्वसनीयता में सुधार हुआ है। संस्थागत निवेश में बढ़ोतरी, आरईआईटी बाजार के विस्तार और सख्त नियामकीय ढांचे ने इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

 
यह भी पढ़ें-
National Stock Exchange

लेखक से अधिक

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

Star Housing Finance Limited

हमें फॉलो करें

150,046फैंसलाइक करें
526फॉलोवरफॉलो करें
337,000सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

अन्य लेटेस्ट खबरें