नई दिल्ली के रूस में राजदूत विनय कुमार ने साफ कहा है कि भारतीय कंपनियां तेल खरीदने के फैसले पूरी तरह कारोबारी आधार पर करती हैं और जहां से सबसे अच्छा सौदा मिलेगा, वहीं से तेल खरीदेंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की ऊर्जा नीति किसी बाहरी दबाव से नहीं बल्कि 140 करोड़ भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाई जाती है।
रूसी समाचार एजेंसी TASS से बातचीत में कुमार ने अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर लगाए गए दोगुने शुल्क को अनुचित, अन्यायपूर्ण और गैर-तर्कसंगत बताया। हाल ही में वाशिंगटन ने भारतीय आयात पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया था, जिससे कुल शुल्क 50 प्रतिशत तक पहुंच गया है। कुमार के अनुसार, “यह कदम निष्पक्ष व्यापार के सिद्धांतों के खिलाफ है और भारत के हितों को नुकसान पहुंचाने वाला है।”
Indian Ambassador to Russia Vinay Kumar says, India will continue to buy oil from wherever it gets the best deal and take measures to protect national interest.#India #Russia #Oil pic.twitter.com/s3IEvgpmY7
— All India Radio News (@airnewsalerts) August 25, 2025
उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य 1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा है। रूस और अन्य देशों के साथ भारत का सहयोग वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता लाने में मदद करता है।” उन्होंने दोहराया कि सरकार हमेशा वही कदम उठाएगी, जिससे देश का राष्ट्रीय हित सुरक्षित रहे। कुमार ने स्पष्ट कहा कि भारत की तेल खरीद-नीति पूरी तरह से वाणिज्यिक लेन-देन पर आधारित है। “अगर सौदे के लिहाज से स्थिति सही रहती है, तो भारतीय कंपनियां वही करेंगी, जो देश के लिए फायदेमंद होगा,” उन्होंने जोड़ा।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि भारत बार-बार अपने रूसी तेल आयात का बचाव कर चुका है। अधिकारियों का कहना है कि सस्ती ऊर्जा भारत की आर्थिक स्थिरता के लिए आवश्यक है, और यह भी तथ्य है कि अमेरिका और यूरोप समेत कई देश अभी भी रूस के साथ कुछ हद तक व्यापार कर रहे हैं।
राजदूत के बयान विदेश मंत्री एस. जयशंकर की टिप्पणियों की गूंज थे। जयशंकर ने भी शनिवार को अमेरिका की ओर से लगाए गए अतिरिक्त शुल्क को “अनुचित और गैर-तर्कसंगत” करार दिया था। उन्होंने साफ कहा था कि भारत अपने किसानों और छोटे उत्पादकों के हितों से समझौता नहीं करेगा।
भुगतान प्रणाली पर उठी आशंकाओं को लेकर कुमार ने कहा कि दोनों देशों ने राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार निपटान के लिए एक स्थिर व्यवस्था बना ली है। “भारत और रूस के बीच भुगतान को लेकर अब कोई समस्या नहीं है,” उन्होंने बताया। 2022 के बाद से पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद भारत ने रूस से तेल आयात में उल्लेखनीय वृद्धि की है। हालांकि द्विपक्षीय व्यापार का बड़ा हिस्सा तेल आयात पर आधारित है, लेकिन रूस के बाजार में भारत का निर्यात अब भी सीमित है।
इस बयान से एक बार फिर यह स्पष्ट हो गया है कि भारत ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है, चाहे अंतरराष्ट्रीय दबाव कितना भी क्यों न हो।
यह भी पढ़ें:
स्मृति शेष: नील आर्मस्ट्रांग, दुनिया के पहले शख्स जिन्होंने चांद पर रखा कदम!



