हाउस के ट्रेड सलाहकार पीटर नवारो द्वारा भारत पर रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था को मदद देने का आरोप लगाने के बाद भारत ने सख्त प्रतिक्रिया दी है। पूर्व राजनयिक और विदेश मंत्रालय के पूर्व प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा कि भारत एक गर्वित राष्ट्र है और हमेशा रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) की नीति का पालन करता आया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत किसी के दबाव या निर्देशों में चलने वाला देश नहीं है।
स्वरूप ने एएनआई से बातचीत में कहा, “अमेरिकी अधिकारी भारत पर हर तरह का दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन भारत हमेशा से अपनी रणनीतिक स्वायत्तता पर चलता आया है। हम किसी के कहने पर नहीं चलेंगे। भारत को निर्देशित करने की कोशिशें बेकार हैं।”
भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर टिप्पणी करते हुए स्वरूप ने कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच व्यक्तिगत संबंध मजबूत हुए थे, तब उम्मीद जगी थी कि दोनों देशों के बीच जल्द ही एक बड़ा व्यापार समझौता होगा। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। उन्होंने कहा, “हम सबको लगा था कि पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच बनी व्यक्तिगत मित्रता के कारण व्यापार समझौता जल्दी हो जाएगा। लेकिन अफसोस ऐसा नहीं हुआ।”
इसके बावजूद स्वरूप ने भरोसा जताया कि दोनों देशों के पास अभी भी समाधान निकालने का समय है। उन्होंने कहा कि आपसी संवाद और बातचीत से ही रास्ता निकलेगा, हालांकि उन्होंने चेतावनी भी दी कि ट्रंप प्रशासन की मौजूदा बयानबाजी संबंधों को नुकसान पहुंचा रही है।
गौरतलब है कि पीटर नवारो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर भारत पर सीधा हमला बोला था। उन्होंने लिखा था कि “राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा भारतीय आयात पर लगाए गए 50 फीसदी टैरिफ प्रभावी हो चुके हैं। यह सिर्फ भारत के अनुचित व्यापार की बात नहीं है, बल्कि पुतिन की युद्ध मशीन को भारत द्वारा दी जा रही आर्थिक जीवनरेखा को काटने का कदम है।” नवारो ने आरोप लगाया कि भारत अमेरिकी निर्यात को ऊंचे टैरिफ लगाकर रोकता है और सस्ते रूसी तेल को खरीदकर परिष्कृत कर मुनाफा कमाता है।
इस बीच, 16 अगस्त को अलास्का में ट्रंप के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने दावा किया कि ट्रंप की सत्ता में वापसी के बाद रूस-भारत व्यापार में 20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। भारत ने अब साफ संदेश दिया है कि वह किसी के दबाव में आकर अपनी विदेश और आर्थिक नीतियां तय नहीं करेगा, चाहे वह अमेरिका जैसा शक्तिशाली देश ही क्यों न हो।
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