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Monday, June 1, 2026
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भारत की वियतनाम के साथ 6,000 करोड़ रुपये की ब्रह्मोस डील पक्की

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भारत ने दक्षिण-पूर्व एशिया में अपनी रक्षा उपस्थिति को और मजबूत करते हुए वियतनाम के साथ ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल प्रणाली की एक बड़ी रक्षा डील को अंतिम रूप दे दिया है। वहीं इंडोनेशिया के साथ भी इसी प्रकार का समझौता अंतिम चरण में पहुंच चुका है। इस जानकारी की पुष्टि रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने शनिवार को सिंगापुर में आयोजित प्रतिष्ठित शांगरी-ला डायलॉग के दौरान मीडिया से बातचीत में की।

राजेश कुमार सिंह ने एक वियतनामी प्रतिनिधि के सवाल के जवाब में कहा, “मेरी समझ के अनुसार इंडोनेशिया और वियतनाम दोनों के साथ समझौते अंतिम चरण में हैं। वास्तव में, मेरी जानकारी के मुताबिक वियतनाम के साथ समझौते पर पहले ही हस्ताक्षर हो चुके हैं। संभवतः इसकी सार्वजनिक घोषणा अभी नहीं हुई है, लेकिन समझौता हो चुका है।”

रिपोर्टों के अनुसार, वियतनाम के लिए ब्रह्मोस मिसाइल पैकेज का मूल्य लगभग 6,000 करोड़ रुपये (करीब 629 मिलियन अमेरिकी डॉलर) आंका गया है। इस पैकेज में मिसाइल प्रणालियों के अलावा प्रशिक्षण और लॉजिस्टिक सहायता भी शामिल होने की संभावना है। यह समझौता भारत के रक्षा निर्यात को बढ़ाने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारियों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

इससे पहले फिलीपींस ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली खरीदने वाला पहला विदेशी देश बना था। वर्ष 2024 में उसे मिसाइलों की पहली खेप प्राप्त हुई थी, जबकि दूसरी खेप अप्रैल 2025 में सौंपी गई। इससे भारत की बड़े रक्षा निर्यात ऑर्डर समय पर पूरा करने की क्षमता भी प्रदर्शित हुई है।

आसियान देशों के साथ रक्षा सहयोग पर जोर देते हुए राजेश कुमार सिंह ने कहा कि भारत क्षेत्र के देशों को भरोसेमंद साझेदार मानता है। उन्होंने कहा, “हम आप सभी को मित्रवत देशों के रूप में देखते हैं, जिनके साथ हम उन्नत रक्षा तकनीकों को साझा कर सकते हैं।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अत्याधुनिक सैन्य तकनीकें सामान्यतः उन्हीं देशों के साथ साझा की जाती हैं जिनके साथ उच्च स्तर का विश्वास और रणनीतिक सहयोग मौजूद हो।

भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित ब्रह्मोस मिसाइल दुनिया की सबसे तेज़ परिचालन सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइलों में गिनी जाती है। तटीय सुरक्षा और समुद्री प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की चाह रखने वाले कई देशों के बीच इस प्रणाली की मांग लगातार बढ़ रही है, खासकर ऐसे समय में जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियां और भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज़ हो रही है।

शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए रक्षा सचिव ने कहा कि भारत एशिया और अन्य क्षेत्रों के साझेदार देशों के साथ मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाएं, भरोसेमंद रक्षा साझेदारी, सुरक्षित समुद्री क्षेत्र और नवाचार आधारित सहयोग विकसित करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में लचीलापन और सामरिक तैयारी सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकताओं में से एक बन चुकी है।

यह घोषणा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की हालिया वियतनाम यात्रा के बाद सामने आई है। इस दौरान उन्होंने अपने वियतनामी समकक्ष जनरल फान वान जियांग के साथ व्यापक बातचीत की थी। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को और मजबूत करने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की थी।

शांगरी-ला डायलॉग के इतर रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने ऑस्ट्रेलिया, यूरोपीय संघ और नीदरलैंड्स के वरिष्ठ अधिकारियों से भी अलग-अलग बैठकें कीं। ऑस्ट्रेलिया की रक्षा सचिव मेघन क्विन के साथ हुई बातचीत में भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी के तहत हुई प्रगति की समीक्षा की गई और रक्षा सहयोग के नए अवसरों पर विचार-विमर्श किया गया।

वियतनाम और इंडोनेशिया के साथ संभावित ब्रह्मोस समझौते केवल रक्षा व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे यह भी दर्शाते हैं कि भारत अब क्षेत्रीय सुरक्षा संरचना में एक महत्वपूर्ण रक्षा प्रौद्योगिकी प्रदाता के रूप में उभर रहा है। बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच ये समझौते दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत के बढ़ते रणनीतिक प्रभाव और कूटनीतिक पहुंच का स्पष्ट संकेत माने जा रहे हैं।

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