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Sunday, January 4, 2026
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चीन-पाक को भारत का करारा जवाब, श्रीनगर में ही होगी G-20 की बैठक

सभी 28 राज्य और आठ केंद्र शासित राज्यों में हो रही बैठक।

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पड़ोसी देशों पाकिस्तान और चीन को करारा झटका देते हुए भारत ने जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में जी-20 देशों की बैठक तय कर दी है। दरअसल दोनों ही देश भारत में जी-20 की मीटिंग के लिए अलग-अलग शहरों में होने वाली बैठकों को लेकर आपत्ति जताते रहे हैं। पिछले ही महीने चीन ने अरुणाचल प्रदेश में जी-20 की मीटिंग होने पर आपत्ति जताई थी। चीन अरुणाचल प्रदेश अपना होने का दावा करता है, जबकि हकीकत ये है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है।  लेकिन भारत ने चीन और पाकिस्तान के विरोध को नजरअंदाज करते हुए श्रीनगर में G-20 बैठक की तारीख तय कर दी है।

भारत ने जी-20 देशों की बैठकों के कैलेंडर को अपडेट करते हुए कहा था कि पर्यटन पर जी-20 के कार्य समूह की बैठक 22 से 24 मई तक श्रीनगर में होगी। हालांकि पाकिस्तान और चीन नहीं चाहते थे कि टूरिज्म पर जी-20 की वर्किंग ग्रुप की मीटिंग यहां हो। पाकिस्तान ने तो इसके लिए सऊदी अरब, तुर्किए और चीन तक से गोलबंदी करने की कोशिश की थी। लेकिन अब इन विरोधियों को करार जवाब देते हुए भारत ने साफ कह दिया है कि बैठक श्रीनगर में ही होगी।

श्रीनगर में होने वाली बैठक की तैयारी बीते साल ही शुरू हो गई थी। खास बात यह है कि सभी 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में जी-20 की बैठक आयोजित की जा रही हैं। वहीं मोदी सरकार इस हाई-प्रोफाइल इवेंट के जरिए दुनिया को यह बताएगी कि इस केंद्र शासित प्रदेश में सामान्य स्थिति लौट आई है। श्रीनगर में जी20 की बैठक वास्तव में मोदी सरकार के लिए एक ऐसा अवसर होगा, जब वह कश्मीर घाटी में मानवाधिकारों के उल्लंघन के पाकिस्तान के दावों का खंडन कर वैश्विक प्रतिनिधियों के सामने उसकी हेकड़ी निकालेगी।

वहीं अगले कुछ महीनों में बीजिंग के साथ कई प्रस्तावित उच्च स्तरीय वार्ताओं के बीच श्रीनगर में जी20 बैठक भी होगी। चीनी रक्षा और विदेश मंत्रियों दोनों के एससीओ बैठकों के लिए जल्द ही भारत आने की उम्मीद है। जुलाई में एससीओ शिखर सम्मेलन की तारीखों को अंतिम रूप देने के लिए भारत वर्तमान में चीन, रूस और अन्य सदस्य देशों के संपर्क में है। यदि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग बैठक में शामिल होने के लिए आते हैं, तो अप्रैल 2020 में पूर्वी लद्दाख में हिंसक संघर्ष के बाद चल रहे सैन्य गतिरोध के बाद से पीएम नरेंद्र मोदी के साथ उनकी पहली द्विपक्षीय बैठक हो सकती है।

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