अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते पर भारत ने फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति अपनाई है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पियूष गोयल ने शुक्रवार (27 फरवरी)को कहा कि अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की पारस्परिक शुल्क (रेसिप्रोकल टैरिफ) नीति को रद्द किए जाने के बाद स्थिति लगातार बदल रही है, इसलिए भारत सावधानीपूर्वक आगे बढ़ेगा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा सुनिश्चित करेगा।
गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायलय ने पिछले सप्ताह ट्रंप प्रशासन द्वारा इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट के तहत लगाए गए पारस्परिक शुल्कों को राष्ट्रपति के अधिकारों का अत्यधिक उपयोग बताते हुए निरस्त कर दिया। अदालत ने अप्रैल पिछले वर्ष लगाए गए व्यापक आयात शुल्कों को असंवैधानिक ठहराया। इस फैसले के बाद भारत सरकार ने अपनी उस प्रतिनिधिमंडल यात्रा को रद्द कर दिया, जो अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए प्रस्तावित थी।
नई दिल्ली में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा, “यह एक बदलती हुई स्थिति है। हम देख रहे हैं कि क्या हो रहा है। हम US में ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन के साथ बातचीत कर रहे हैं और बेशक, अंदरूनी बातचीत चल रही है। हमें इंतज़ार करना होगा और देखना होगा और यह पक्का करना होगा कि भारत के सबसे अच्छे हितों की रक्षा हो।”
उन्होंने आगे कहा, “मैं सभी देशवासियों को भरोसा दिलाना चाहता हूं कि भारत US के साथ सबसे अच्छे मौकों पर बातचीत करने, दूसरी उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों के मुकाबले हमें सबसे अच्छी डील देने, और टेक्नोलॉजी जैसे हमारे फायदे के एरिया में ज़्यादा जुड़ाव के दरवाज़े खोलने के लिए पक्का इरादा रखता है।”
इससे एक दिन पहले गोयल ने अपने अमेरिकी समकक्ष हॉवर्ड लुटनिक और भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जिओ गोर से नई दिल्ली में मुलाकात की थी। बैठक में द्विपक्षीय व्यापार, निवेश और प्रौद्योगिकी सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
हालांकि व्यापार समझौते की रूपरेखा पहले ही घोषित की जा चुकी थी और इसे अप्रैल तक लागू करने की योजना थी, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद स्थिति में अनिश्चितता पैदा हो गई है। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अदालत के आदेश का प्रस्तावित व्यापार समझौते पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। फिलहाल दोनों देशों के बीच संवाद जारी है, जबकि भारत ने स्पष्ट किया है कि किसी भी अंतिम निर्णय से पहले वह अपने आर्थिक हितों और प्रतिस्पर्धात्मक लाभ को प्राथमिकता देगा।
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