भारतीय शस्त्र कंपनी ब्रिटिश सेना के प्रोजेक्ट ग्रेबर्न के लिए लगाएगी बोली

भारतीय शस्त्र कंपनी ब्रिटिश सेना के प्रोजेक्ट ग्रेबर्न के लिए लगाएगी बोली

Indian arms company to bid for British Army's Project Grayburn

बेंगलुरु स्थित भारतीय स्मॉल आर्म्स निर्माता SSS डिफेंस ने ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट ग्रेबर्न में भाग लेने की औपचारिक घोषणा की है। यह कार्यक्रम ब्रिटिश सेना की मौजूदा SA80 राइफलों को बदलने के लिए शुरू किया गया है। किसी भारतीय निजी स्मॉल आर्म्स कंपनी द्वारा इतने बड़े विदेशी सैन्य अनुबंध के लिए बोली लगाने का यह पहला मामला माना जा रहा है।

कंपनी ने शनिवार को सोशल मीडिया मंच X पर घोषणा करते हुए कहा, “हमने UK MoD के प्रोजेक्ट ग्रेबर्न में हिस्सा लेने का पक्का फ़ैसला किया है”  कंपनी ने सार्वजनिक रूप से बोली लगाने का कारण बताते हुए कहा, “हमने अपने भारतीय ग्राहकों को सफलतापूर्वक डिलीवर किया है; काम शब्दों से ज़्यादा बोलते हैं क्योंकि हमें अपने वेपन सिस्टम के प्रोग्रेसिव डिज़ाइन, मैन्युफैक्चरिंग क्वालिटी और बैटलफील्ड रिलायबिलिटी पर पूरा भरोसा है। क्योंकि कमिटमेंट ‘we might’ को ‘we will’ में तब्दील करता है। भारत से दुनिया तक।”

यह घोषणा ऐसे समय आई है जब ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय ने प्रोजेक्ट ग्रेबर्न के लिए अवधारणा चरण नोटिस जारी किया है। इस कार्यक्रम के तहत 1980 के दशक से उपयोग में रही SA80 राइफल श्रृंखला को बदला जाएगा। SA80 वर्तमान में L85A3 संस्करण में है, इसे समय-समय पर अपग्रेड किया गया है, लेकिन आधुनिक युद्ध की बदलती जरूरतों के कारण नई पीढ़ी की राइफल की आवश्यकता महसूस की जा रही है, जैसे मॉड्यूलरिटी, एर्गोनॉमिक्स, सप्रेसर उपयोग, नए गोला-बारूद मानक, NATO इंटरऑपरेबिलिटी और शहरी अभियान।

ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय के अनुसार, नई राइफलें ब्रिटेन में ही निर्मित की जाएंगी ताकि घरेलू आपूर्ति श्रृंखला मजबूत हो, रोजगार सृजित हो और निर्यात के अवसर बढ़ें। अनुमान है कि 1 अप्रैल 2028 से 31 मार्च 2045 तक 17 वर्षों की अवधि वाले इस अनुबंध के तहत कम से कम दो लाख राइफलें खरीदी जा सकती हैं।

प्रोजेक्ट ग्रेबर्न के तहत पांच अलग-अलग वेरिएंट विकसित किए जाएंगे, जिनमें मानक और शॉर्ट  व्यक्तिगत रक्षा हथियार, जनरलिस्ट और कैडेट राइफल शामिल हैं, जो मौजूदा SA80A3, L22 कार्बाइन और L98 कैडेट राइफलों का स्थान लेंगी।

बता दें की, बेंगलुरु आधारित SSS डिफेन्स भारत के रक्षा आत्मनिर्भरता अभियान के बीच उभरती निजी कंपनी है, जो मल्टी-कैलिबर मॉड्यूलर राइफल, उन्नत ऑप्टिक्स और एक्सेसरीज़ के निर्माण में विशेषज्ञता रखती है। कंपनी पहले भारतीय सेना को AK-47 राइफलों के लिए स्वदेशी अपग्रेड किट उपलब्ध करा चुकी है, जिससे पकड़, सटीकता और हैंडलिंग में सुधार हुआ।

इसके अलावा, कंपनी ने 7.62×39 मिमी कारतूस पर आधारित अपनी स्वदेशी P-72 असॉल्ट राइफल विभिन्न राज्य पुलिस स्पेशल टास्क फोर्स को आपूर्ति करने के कई अनुबंध हासिल किए हैं।

प्रोजेक्ट ग्रेबर्न में सार्वजनिक रूप से भागीदारी की घोषणा कर SSS डिफेंस ने वैश्विक रक्षा बाजार में अपनी महत्वाकांक्षा स्पष्ट कर दी है। हालांकि, अंतिम चयन प्रक्रिया और घरेलू निर्माण की ब्रिटेन की शर्तों के मद्देनजर प्रतिस्पर्धा कड़ी रहने की संभावना है।

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