ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय सेना ड्रोन से निगरानी के साथ हमला करने और दुश्मन के ड्रोन को नष्ट करने की क्षमता भी बढ़ा रही है। जुलाई से सितंबर के बीच जारी खरीद प्रस्तावों से पता चलता है कि सेना ड्रोन युद्ध से जुड़ी पूरी व्यवस्था मजबूत कर रही है। इनमें दूर तक निगरानी, लक्ष्य पहचानने, एफपीवी ड्रोन से हमला या पेलोड गिराने, सैनिकों को ड्रोन की ट्रेनिंग और दुश्मन ड्रोन को खोजकर नष्ट करने वाला स्किल शामिल है।
स्वदेशी डिफेंस कंपनी SMPP इस पर काम कर रही है। इससे पहले, कंपनी SMPP ने सेना को 106 टर्बोजेट-पावर्ड ‘कामिकेज़’ ड्रोन सौंपे हैं। इनका नाम ‘पीसकीपर (अग्निवेग)’ रखा गया है। इसमें लंबी दूरी तक निगरानी, लक्ष्य पहचानने, FPV ड्रोन से हमला करने या पेलोड गिराने, सैनिकों को ट्रेनिंग देने और दुश्मन के ड्रोन को नाकाम करने वाले उपकरण शामिल हैं। भास्कर ने जुलाई से सितंबर के बीच सामने आए सेना के ड्रोन और काउंटर-ड्रोन संबंधी खरीद प्रस्तावों की पड़ताल की।
सेना ने हाल ही में 9 लो एल्टीट्यूड एरियल थ्रेट रिस्पॉन्स एंड मिटिगेशन सिस्टम खरीदने की प्रक्रिया शुरू की है। इससे पहले 10 इंटीग्रेटेड लॉन्ग रेंज सर्विलांस ड्रोन के लिए टेंडर जारी किया गया था। सूत्रों के अनुसार एक तरफ सेना लंबी दूरी तक निगरानी वाले ड्रोन चाहती है। वहीं, कम ऊंचाई पर आने वाले हवाई खतरों से निपटने के सिस्टम भी ले रही है।
सेना ने ड्रोन्स के लिए 273 आइटम की एक फेहरिस्त जारी की है। इसमें मोटर, इलेक्ट्रॉनिक स्पीड कंट्रोलर, ग्राउंड कंट्रोल सिस्टम, फ्लाइट कंट्रोलर, कैमरा और बैटरी के साथ रिमोटली ऑपरेटेड मल्टी-पेलोड रिलीज मैकेनिज्म भी शामिल हैं। सर्विलांस ड्रोन का काम तस्वीर या वीडियो भेजना है। पेलोड रिलीज मैकेनिज्म ड्रोन को किसी वस्तु को तय जगह पर गिराने की क्षमता देता है।
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