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Tuesday, February 3, 2026
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भारत-ईयू एफटीए से वापी के व्यापारियों में उत्साह, कहा- निर्यात को मिलेगी नई ताकत!

उद्योग जगत का मानना है कि इस डील से न केवल नए अंतरराष्ट्रीय बाजार खुलेंगे, बल्कि निर्यात को भी मजबूती मिलेगी और अमेरिकी बाजार में हुए नुकसान की भरपाई का रास्ता साफ होगा।

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यूरोपीय यूनियन और भारत के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) को लेकर गुजरात की औद्योगिक नगरी वापी में उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है। खासतौर पर अमेरिकी टैरिफ के चलते बीते कुछ समय से कठिन दौर से गुजर रहे वापी के उद्योगों के लिए यूरोपीय यूनियन के साथ हुआ यह समझौता बेहद अहम माना जा रहा है।

उद्योग जगत का मानना है कि इस डील से न केवल नए अंतरराष्ट्रीय बाजार खुलेंगे, बल्कि निर्यात को भी मजबूती मिलेगी और अमेरिकी बाजार में हुए नुकसान की भरपाई का रास्ता साफ होगा।

औद्योगिक नगरी वापी और आसपास के क्षेत्रों में छोटे-बड़े करीब 10 हजार से अधिक उद्योग-धंधे हैं। यह क्षेत्र स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज का हब माना जाता है। औद्योगिक क्षेत्र में केमिकल, फार्मा, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग और पेपर उद्योग बड़े पैमाने पर विकसित हुए हैं। यहां की कई बड़ी कंपनियों के दुनिया के कई देशों के साथ व्यापारिक संबंध हैं। विदेशी मुद्रा अर्जित करने वाले ये उद्योग पिछले कुछ समय से ट्रंप टैरिफ के कारण मुश्किल दौर से गुजर रहे थे।

अमेरिका के विकल्प के रूप में अन्य देशों में बाजार तलाशे जा रहे थे। ऐसे समय में अब भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच हुए इस ट्रेड एग्रीमेंट से यहां के उद्योगों को नया बाजार मिलने की उम्मीद है। अमेरिका के विकल्प के रूप में अब यूरोपीय देशों के साथ व्यापारिक संबंधों को आसानी से बढ़ाया जा सकेगा और इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट में भी लाभ होने की संभावना जताई जा रही है।

मंगलम ड्रग्स कंपनी के डायरेक्टर डॉ. कमल वसी ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि इस समझौते के बाद फार्मा सेक्टर के लिए यूरोप के सभी देशों का बाजार खुल गया है। वापी और आसपास के क्षेत्रों की फार्मा इंडस्ट्री अमेरिकी टैरिफ की वजह से गंभीर समस्याओं का सामना कर रही थी, लेकिन एफटीए के बाद बाजार में सकारात्मक संदेश गया है।

डॉ. वसी ने कहा कि यूरोपीय देशों के साथ कारोबार अब और तेजी से बढ़ेगा, क्योंकि वहां टैरिफ नहीं लगेगा। भारत दुनिया का सबसे बड़ा जेनेरिक दवाओं का उत्पादक है और अब बिना टैरिफ के यूरोप में भारतीय दवाओं की पहुंच बढ़ेगी, जिससे उद्योग को बड़ा फायदा होगा।

अग्रणी उद्योगपति शरद ठाकर ने भी इस डील को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हुआ यह समझौता अब तक का सबसे फायदेमंद ट्रेड एग्रीमेंट है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी टैरिफ की वजह से भारतीय कारोबारियों को जो नुकसान उठाना पड़ा, उसकी भरपाई के लिए नए बाजारों की सख्त जरूरत थी। यूरोपीय यूनियन के साथ हुई इस डील से यूरोपीय देशों में कारोबार करना आसान होगा और भारतीय उद्योगों को स्थिरता मिलेगी।

वापी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष सतीश पटेल ने आईएएनएस से बातचीत में बताया कि औद्योगिक नगरी वापी और आसपास के क्षेत्रों में छोटे-बड़े मिलाकर करीब 10 हजार से अधिक उद्योग कार्यरत हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा किया गया यह “मदर ऑफ ऑल डील” फार्मा, पेस्टीसाइड्स समेत कई सेक्टरों के लिए बेहद लाभकारी साबित होगा, क्योंकि यूरोप के देशों में सीधे कारोबार के अवसर मिलेंगे। अमेरिकी टैरिफ के चलते उद्योगों को जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई नए यूरोपीय बाजारों से की जा सकती है।

सतीश पटेल के अनुसार, यह समझौता वापी के उद्योगों के लिए एक माइलस्टोन साबित होगा और ‘विकसित भारत’ के विजन को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा। इस एफटीए से भारतीय उद्योगों को इंपोर्ट और एक्सपोर्ट दोनों के लिए व्यापक बाजार मिलेगा, जिससे औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी।

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