होर्मुज़ से LPG टैंकरों को निकालने के लिए भारतीय नौसेना की खामोशी से चलाया ‘ऑपरेशन संकल्प’

होर्मुज़ से LPG टैंकरों को निकालने के लिए भारतीय नौसेना की खामोशी से चलाया ‘ऑपरेशन संकल्प’

Indian Navy quietly launched 'Operation Sankalp' to evacuate LPG tankers from the Strait of Hormuz

खाड़ी क्षेत्र में युद्ध के बीच भारतीय नौसेन ने खामोशी से अपनी रणनीतिक मजबूती का परिचय दिया है। ऑपरेशन संकल्प के तहत भारतीय नौसेना ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले भारतीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपने युद्धपोत तैनात किए हैं। हाल के दिनों में होर्मुज़ जलडमरूमध्य युद्ध स्थिती के कारण बंद हो चुका है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका बनी हुई है। इस संवेदनशील स्थिति में भारतीय नौसेना के कम से कम तीन युद्धपोत ओमान की खाड़ी में तैनात किए गए हैं, जो भारतीय वाणिज्यिक जहाजों को सुरक्षित लाने का काम कर रहें है।

इस तैनाती का प्रभाव भी अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। लगभग दो सप्ताह के अंतराल के बाद भारत आने वाले एलपीजी टैंकर सुरक्षित रूप से जलडमरूमध्य पार करने में सफल हुए हैं। ‘शिवालिक’ टैंकर हाल ही में गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर तड़के पहुंचा। इसके साथ ‘नंदा देवी’ टैंकर भी इस मिशन का हिस्सा रहा। दोनों जहाजों में कुल मिलाकर लगभग 92,700 मीट्रिक टन एलपीजी लदी हुई थी।

इन टैंकरों को उच्च जोखिम वाले क्षेत्र से बाहर निकालने के लिए भारतीय नौसेना के एक युद्धपोत ने एस्कॉर्ट किया, जो पूरी तरह सक्रिय एयर डिफेंस सिस्टम के साथ तैनात था। यह पूरी कार्रवाई बेहद शांत तरीके से अंजाम दी गई, लेकिन इसका प्रभाव रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

यह कदम अचानक नहीं उठाया गया, बल्कि 2019 में शुरू किए गए ‘ऑपरेशन संकल्प’ की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। इस मिशन का उद्देश्य फारस की खाड़ी, ओमान की खाड़ी और अदन की खाड़ी में संचालित भारतीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, खासकर तब जब क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव चरम पर है।

दूसरी ओर डोनाल्ड ट्रंप ने चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और यूरोपीय देशों से अपील की है कि वे अमेरिकी नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल होकर समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। वहीं भारत ने अपनी ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ की नीति पर कायम रहते हुए स्वतंत्र रूप से कार्रवाई करना चुना है। भारत ने न केवल अपने नौसैनिक संसाधनों की तैनाती की है, बल्कि तेहरान के साथ कूटनीतिक संवाद भी बनाए रखा है।

हालांकि स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है। इस समय फारस की खाड़ी में 22 भारतीय ध्वज वाले जहाज संचालित हो रहे हैं, जिनमें 600 से अधिक भारतीय नाविक सवार हैं। इसके अलावा, कई विदेशी जहाज भी भारत के लिए माल लेकर इस क्षेत्र में फंसे हुए हैं।

इस परिप्रेक्ष्य में भारतीय नौसेना की यह खामोश लेकिन प्रभावी कार्रवाई न केवल देश की ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभा रही है, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की स्वतंत्र और संतुलित रणनीति को भी मजबूती दे रही है।

यह भी पढ़ें:

145 करोड़ जनशक्ति बोले तो 500 साल पुरानी समस्या भी सुलझती: योगी​!

बिहार राज्यसभा चुनाव: महागठबंधन को झटका, एनडीए के पांचवें उम्मीदवार की बढ़त​!

​एक ऐसी औषधीय झाड़ी, जिसके फल से लेकर जड़ तक में छिपा है सेहत का राज​!

Exit mobile version