“तुमने मुझे पर्ल हार्बर के बारे में क्यों नहीं बताया?” ट्रंप के जवाब ने जापान की प्रधानमंत्री को किया असहज

“तुमने मुझे पर्ल हार्बर के बारे में क्यों नहीं बताया?” ट्रंप के जवाब ने जापान की प्रधानमंत्री को किया असहज

"Why didn't you tell me about Pearl Harbor?" Trump's reply unnerved Japan's prime minister.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची के बीच व्हाइट हाउस में हुई मुलाकात के दौरान कूटनीतिक माहौल असहज हो गया जैसे ही ट्रंप ने ‘पर्ल हार्बर’ का जिक्र कर दिया। हालांकि, इससे पहले उन्होंने पश्चिम एशिया में जापान की भूमिका की खुलकर सराहना की।

ओवल ऑफिस में हुई बैठक के दौरान ट्रंप ने कहा, “मेरा मानना ​​है कि, कल, परसों हमें जापान के बारे में जो बयान दिए गए थे, उनके आधार पर वे सच में आगे आ रहे हैं।” अर्थात अमेरिका जापान के सहयोग से संतुष्ट दिखा। हालांकि,   इसके तुरंत बाद ट्रंप ने “नाटो के विपरीत” कहकर नाटो देशों पर फिर निशाना साधा।

गौरतलब है कि हाल के दिनों में ट्रंप अपने सहयोगी देश, खासकर जापान, ब्रिटेन और अन्य यूरोपीय देशों की आलोचना कर चुके थे कि वे होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित बनाने के प्रयासों में पर्याप्त योगदान नहीं दे रहे हैं। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा वहन करता है।

बैठक से ठीक पहले जापान, ब्रिटेन, फ्रांस सहित छह देशों ने संयुक्त रूप से बयान जारी कर कहा था कि वे होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के लिए उचित प्रयासों में योगदान देना के लिए तैयार हैं। ट्रंप ने भी इसे  उचित बताया और यह रेखांकित किया कि जापान अपनी लगभग 90% तेल जरूरतें इसी मार्ग से पूरी करता है।

हालांकि, बातचीत के दौरान एक संवेदनशील मोड़ तब आया जब एक जापानी पत्रकार ने ईरान पर हमलों को लेकर सहयोगी देशों को पहले से जानकारी न देने पर सवाल किया। इस पर ट्रंप ने कहा,“हमनें इसके (हमलें के) बारे में किसी से नहीं कहा था। हम उन्हें सरप्राइज करना चाहते थे।  जापान से बेहतर सरप्राइज़ के बारे में कौन जानता है? तुमने मुझे पर्ल हार्बर के बारे में क्यों नहीं बताया?”

ट्रंप की इस टिप्पणी से माहौल कुछ देर के लिए असहज हो गया। दरअसल पर्ल हार्बर पर 7 दिसंबर 1941 को जापान के हमले ने अमेरिका को द्वितीय विश्व युद्ध में उतरने के लिए मजबूर किया था। इस टिप्पणी के दौरान तकेइची के चेहरे के हावभाव में भी असहजता देखी गई।

इसके बावजूद, दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत संबंधों में गर्मजोशी नजर आई। ट्रंप ने ताकाइची से कहा, “मुझे तुम पर बहुत गर्व है। हम दोस्त बन गए हैं,”।

बता दें की, जापान के लिए विदेश में अपनी सेल्फ-डिफेंस फोर्स भेजना राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा है, क्योंकि देश का 1947 का संविधान युद्ध-विरोधी नीति पर आधारित है। इसके बावजूद, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ऊर्जा सुरक्षा की चिंताओं के बीच टोक्यो की भूमिका अहम होती जा रही है।

इस बीच, अमेरिका-जापान संबंधों की अहमियत इसलिए भी बनी हुई है क्योंकि जापान में दशकों से करीब 60,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं, जो उसकी सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, खासकर चीन के बढ़ते प्रभाव के मद्देनजर।

हालांकि, जापान के भीतर ताकाइची सरकार को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। हालिया सर्वेक्षणों के मुताबिक, ईरान युद्ध के कारण बढ़ती तेल और गैस कीमतों से आम जनता और उद्योगों पर दबाव बढ़ रहा है, जिससे सरकार की लोकप्रियता पर असर पड़ सकता है। कुल मिलाकर, यह मुलाकात जहां एक ओर सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने का संकेत देती है, वहीं ट्रंप की विवादित टिप्पणी ने कूटनीतिक संवेदनशीलता की याद भी दिला दी है।

यह भी पढ़ें:

पश्चिम एशिया संकट बीच पीएम मोदी ने 24 घंटे में चार देशों से की बातचीत!

बंगाल चुनाव 2026: भाजपा ने दूसरी लिस्ट की जारी, 111 उम्मीदवारों के नाम शामिल!

दलाल स्ट्रीट पर बुल्स की वापसी: सेंसेक्स 800 अंक उछला, निफ्टी 23,200 के पार

Exit mobile version