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भारत का डेयरी निर्यात 2024-25 में 80 प्रतिशत की वृद्धि के साथ रिकॉर्ड स्तर पर! 

राष्ट्रीय पशुधन मिशन (एनएलएम) की शुरुआत मुर्गी पालन, भेड़, बकरी और सूअर पालन में उद्यमिता विकास और नस्ल सुधार पर विशेष ध्यान केंद्रित करने के लिए की गई है।

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भारत ने 2024-25 के दौरान डेयरी उत्पादों के निर्यात में 80 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है और यह 492.9 मिलियन डॉलर का हो गया है, जिससे भारत खाद्य क्षेत्र में विदेशी मुद्रा अर्जित करने वाला एक महत्वपूर्ण देश बन गया है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मात्रा के लिहाज से वित्त वर्ष के दौरान डेयरी निर्यात 113,350.4 मीट्रिक टन रहा, जो 2023-24 के इसी आंकड़े की तुलना में 77.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

भारतीय दुग्ध उत्पादों के प्रमुख निर्यात गंतव्यों में संयुक्त अरब अमीरात, संयुक्त राज्य अमेरिका, सऊदी अरब, बांग्लादेश और भूटान शामिल हैं। भारत 1998 से दुनिया में दूध उत्पादन में पहले स्थान पर है और अब वैश्विक दूध उत्पादन में 25 प्रतिशत का योगदान देता है।

संसद में प्रस्तुत आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत का दूध उत्पादन पिछले 10 वर्षों में 63.56 प्रतिशत बढ़कर 2023-24 में 239.2 मिलियन टन हो गया है, जो 2014-15 में 146.3 मिलियन टन था। इस दौरान यह 5.7 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ रहा है, जबकि विश्व दूध उत्पादन 2 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से बढ़ रहा है।

देश में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता पिछले एक दशक में 48 प्रतिशत बढ़कर 2023-24 में 471 ग्राम/व्यक्ति/दिन से अधिक हो गई है, जबकि विश्व में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता 322 ग्राम/व्यक्ति/दिन है। संसद में डेयरी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा कार्यान्वित की जा रही विभिन्न योजनाओं की भी जानकारी दी गई।

केंद्र का राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (एनपीडीडी) विभाग राज्य सरकारों द्वारा दूध उत्पादन और दूध प्रसंस्करण अवसंरचना के लिए किए गए प्रयासों को पूरक और संपूरित करने के लिए पूरे देश में कार्यान्वित किया जा रहा है।

राज्य डेयरी सहकारी संघों की सहायता के लिए, केंद्र सरकार प्रतिकूल बाजार स्थितियों या प्राकृतिक आपदाओं के कारण उत्पन्न संकट से निपटने के लिए कार्यशील पूंजी ऋण के संबंध में ब्याज अनुदान भी प्रदान कर रही है।

पशुपालन अवसंरचना विकास निधि (एएचआईडीएफ) का कार्यान्वयन व्यक्तिगत उद्यमियों, डेयरी सहकारी समितियों, किसान उत्पादक संगठनों, निजी कंपनियों, एमएसएमई और धारा 8 कंपनियों द्वारा स्थापित पात्र परियोजनाओं के वित्तपोषण हेतु किया जा रहा है, ताकि अनुसूचित बैंकों द्वारा पशुपालन क्षेत्र में प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन हेतु उनके निवेश को बढ़ावा दिया जा सके।

इस योजना के तहत, डेयरी प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन अवसंरचना, पशु आहार निर्माण संयंत्र, नस्ल सुधार प्रौद्योगिकी और नस्ल गुणन फार्म, पशु अपशिष्ट से धन प्रबंधन (कृषि अपशिष्ट प्रबंधन) और पशु चिकित्सा टीका एवं औषधि उत्पादन सुविधाओं की स्थापना के लिए ऋण सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

गोजातीय पशुओं के दूध उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ाने के लिए, सरकार देशी नस्लों के विकास और संरक्षण तथा गोजातीय आबादी के आनुवंशिक उन्नयन हेतु राष्ट्रीय गोकुल मिशन लागू कर रही है।

राष्ट्रीय पशुधन मिशन (एनएलएम) की शुरुआत मुर्गी पालन, भेड़, बकरी और सूअर पालन में उद्यमिता विकास और नस्ल सुधार पर विशेष ध्यान केंद्रित करने के लिए की गई है।

इसके तहत व्यक्तियों, एफपीओ, स्वयं सहायता समूहों, धारा 8 कंपनियों को उद्यमिता विकास के लिए और राज्य सरकारों को नस्ल सुधार के इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए प्रोत्साहन प्रदान किया जाएगा।

इसके अलावा, पशुधन स्वास्थ्य और रोग नियंत्रण कार्यक्रम में पशु रोगों के खिलाफ रोगनिरोधी टीकाकरण, पशु चिकित्सा सेवाओं की क्षमता निर्माण, रोग निगरानी और पशु चिकित्सा इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने का प्रावधान है।

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