साउथ चाइना सी में बहुपक्षीय युद्धाभ्यास के लिए पहुंचा INS ‘निस्तार’!

पहली विदेशी यात्रा पर दिखाएगा ताकत

साउथ चाइना सी में बहुपक्षीय युद्धाभ्यास के लिए पहुंचा INS ‘निस्तार’!

ins-nistar-multinational-exercise-south-china-sea

भारतीय नौसेना का नवीनतम डाइविंग सपोर्ट वेसल (DSV) INS ‘निस्तार’ अपनी पहली विदेशी तैनाती पर सिंगापुर पहुंच चुका है। यह स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित जहाज अब चांगी नेवल बेस से बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास ‘पैसिफिक रीच 2025 (एक्सपीआर-25)’ में हिस्सा लेगा। यह अभ्यास सोमवार, 15 सितंबर से शुरू हो रहा है और इसमें 40 से अधिक देश सीधे प्रतिभागी या पर्यवेक्षक के तौर पर शामिल होंगे।

2018-19 में पूर्वी और पश्चिमी तट के लिए दो डीएसआरवी निस्तार शामिल होने के बाद भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया, जिनके पास डेडिकेटेड पनडुब्बी बचाव प्रणाली है। यह अत्याधुनिक प्रणाली 650 मीटर गहराई तक पनडुब्बी रेस्क्यू अभियान चलाने में सक्षम है। इस बार आयोजित अभ्यास का मकसद विभिन्न देशों के बचाव प्लेटफॉर्म को एक मंच पर लाना, प्रक्रियाओं का मानकीकरण करना और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करते हुए इंटरऑपरेबिलिटी को बढ़ाना है।

अभ्यास दो चरणों में होगा पहला हार्बर फेज, जो एक सप्ताह तक चलेगा। इसमें सबमरीन रेस्क्यू सिस्टम पर चर्चा, मेडिकल सिम्पोजियम, विषय विशेषज्ञों का आदान-प्रदान और प्रतिभागी देशों के बीच क्रॉस डेक विजिट शामिल होंगे। इसके बाद सी फेज में आईएनएस निस्तार अन्य देशों की नौसैनिक इकाइयों के साथ संयुक्त रूप से विभिन्न हस्तक्षेप और बचाव अभियानों का प्रदर्शन करेगा।

आईएनएस निस्तार को 18 जुलाई 2025 को नौसेना में कमीशन किया गया था। यह ईस्टर्न फ्लीट के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग के अधीन संचालित होता है। जहाज में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी तकनीक और उपकरणों का उपयोग हुआ है, जिनमें साइड स्कैन सोनार, वर्क और ऑब्जर्वेशन क्लास आरओवी तथा उन्नत डीप सी डाइविंग सिस्टम शामिल हैं। यह जहाज आवश्यकता पड़ने पर डीप रेस्क्यू व्हीकल के रूप में किसी भी तट पर हवाई मार्ग से भेजा जा सकता है और ‘वेसल्स ऑफ अपॉर्च्युनिटी’ पर तैनात होकर गहरे समुद्र में बचाव अभियान चला सकता है।

INS निस्तार का यह मिशन न केवल भारत की आत्मनिर्भरता और शिपबिल्डिंग क्षेत्र में उपलब्धियों को दर्शाता है, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उसकी रणनीतिक उपस्थिति और साझेदार देशों के साथ सहयोग की क्षमता को भी मजबूत करता है।

यह भी पढ़ें:

विपक्ष को बिहार में होता विकास नहीं दिख रहा : चिराग पासवान!

भारत-अमेरिका टैरिफ वॉर: 10 रुपये विवाद पर बड़ा खुलासा!

अयोध्या-वाराणसी हाईस्पीड एक्सप्रेस-वे से पर्यटन, विकास को नई उड़ान!

Exit mobile version