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Sunday, October 18, 2026
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अमेरिका-ग्रीनलैंड विवाद से निवेशक सतर्क, बाजार में अस्थिरता की आशंका!

रिपोर्ट में कहा गया है कि आगे चलकर निवेशक इस सौदे के बारे में और अधिक जानकारी की प्रतीक्षा करेंगे, क्योंकि इसमें कुछ ऐसे अहम मुद्दे हैं।

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एक रिपोर्ट के अनुसार, ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका की प्रस्तावित योजना के कारण निवेशकों की चिंता अभी बनी रह सकती है। इस मुद्दे से जुड़े कारणों की वजह से निकट भविष्य में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है।

बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट में कहा गया है कि निवेशक फिलहाल इस प्रस्ताव से जुड़ी और जानकारी का इंतजार कर रहे हैं। इन जानकारियों से यह तय होगा कि अमेरिका और अन्य देशों के बीच बातचीत सफल होगी या उसमें रुकावट आएगी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि आगे चलकर निवेशक इस सौदे के बारे में और अधिक जानकारी की प्रतीक्षा करेंगे, क्योंकि इसमें कुछ ऐसे अहम मुद्दे हैं, जिनकी वजह से बातचीत पटरी से उतर सकती है। इसी कारण बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।

कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्यवस्था अमेरिका और डेनमार्क के बीच 1951 में हुए सुरक्षा समझौते का ही एक नया रूप हो सकती है।

बैंक ऑफ बड़ौदा की अर्थशास्त्री अदिति गुप्ता के अनुसार, आगे होने वाली बातचीत में ग्रीनलैंड में अमेरिकी सेना की मौजूदगी, वहां के खनिज संसाधनों के इस्तेमाल और ग्रीनलैंड की संप्रभुता जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड में अमेरिका की रुचि को राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं से प्रेरित बताया है। हालांकि, ग्रीनलैंड में मौजूद तेल, गैस और दुर्लभ खनिज तत्वों जैसे संसाधन भी अमेरिका के लिए आकर्षण का कारण हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और नाटो के बीच एक फ्रेमवर्क समझौते की घोषणा से निवेशकों को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन इस समझौते की पूरी जानकारी अभी साफ नहीं है।

ग्रीनलैंड को लेकर बयानबाजी तेज होने के बाद भू-राजनीतिक तनाव बढ़ गया और बाजारों में हलचल मच गई। अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा ग्रीनलैंड को अपने में मिलाने की बात कहने और विरोध करने वाले यूरोपीय देशों पर आर्थिक कदम उठाने की धमकी से हालात और बिगड़ गए।

इसके जवाब में फ्रांस, जर्मनी और स्वीडन सहित कई यूरोपीय देशों ने ग्रीनलैंड में सैन्य तैनाती बढ़ा दी, जिससे तनाव और बढ़ गया।

डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की थी कि 1 फरवरी 2026 से ब्रिटेन, डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड और फिनलैंड से आने वाले सामान पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैक्स लगाया जाएगा। यह टैक्स 1 जून 2026 से बढ़कर 25 प्रतिशत होने वाला था।

हालांकि बाद में दावोस में हुए विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की बैठक के दौरान ट्रंप ने यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी से पीछे हटने का संकेत दिया।

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