खामेनेई के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करने वाले 26 वर्षीय युवा को होगी फांसी!

खामेनेई के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करने वाले 26 वर्षीय युवा को होगी फांसी!

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ईरान में जारी देशव्यापी खामेनेई विरोधी प्रदर्शनों के बीच एक चिंताजनक घटनाक्रम सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरानी अधिकारी 26 वर्षीय प्रदर्शनकारी एरफान सोल्तानी को फांसी देने की तैयारी कर रहे हैं। यदि यह सजा लागू होती है, तो यह मौजूदा विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में पहली फांसी होगी। इस फांसी को इस्लामी रिजीम द्वारा डर कायम बनाने के उपाय के तौर पर देखा जा रहा है।

एरफान सोल्तानी तेहरान के कराज उपनगर के फर्दीस इलाके का निवासी है। एरफान को 8 जनवरी कोगिरफ्तार किया गया था। उस पर आरोप है कि उसने सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों में भाग लिया। मानवाधिकार संगठनों और मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सोल्तानी को सुनाई गई मौत की सजा बुधवार (14 जनवरी)को लागू की जा सकती है।

ईरान में असहमति को दबाने के लिए पहले भी मौत की सजा का इस्तेमाल किया गया है, लेकिन मौजूदा लहर में अधिकांश मामलों में प्रदर्शनकारियों पर गोलियां बरसाई गई है। सोल्तानी को फांसी दिए जाने की तैयारी को इस लिहाज से असाधारण माना जा रहा है कि यह वर्तमान विरोध प्रदर्शनों के दौरान इस तरह की पहली फांसी होगी।

इज़राइल और अमेरिका आधारित मीडिया एजेंसी ने रिपोर्ट किया है कि सोल्तानी का मामला फास्ट-ट्रैक फांसी की एक श्रृंखला की शुरुआत हो सकता है, जिसका उद्देश्य आगे होने वाले प्रदर्शनों को रोकना है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरानी अधिकारी भय का माहौल बनाकर सड़कों पर उतर रहे लोगों को पीछे हटने के लिए मजबूर करना चाहते हैं।

नॉर्वे में पंजीकृत कुर्द मानवाधिकार संगठन हेंगॉ ऑर्गनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स ने इस मामले में कानूनी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। संगठन के अनुसार, गिरफ्तारी के बाद से सोल्तानी को बुनियादी कानूनी अधिकार नहीं दिए गए। उसे न तो स्वतंत्र कानूनी सलाहकार तक पहुंच मिली और न ही अपने बचाव में पक्ष रखने का अवसर।

रिपोर्टों के मुताबिक, सोल्तानी के परिवार को भी लंबे समय तक मामले की जानकारी नहीं दी गई। 11 जनवरी को उन्हें बताया गया कि सोल्तानी को मौत की सजा सुनाई जा चुकी है। इसके बाद परिवार को उससे केवल 10 मिनट की मुलाकात की अनुमति दी गई। परिवार के एक करीबी ने हेंगॉ को बताया कि अधिकारियों ने सजा अंतिम मान ली है और तय समय पर ही लागू की जाएगी।

सोल्तानी की बहन स्वयं एक लाइसेंस प्राप्त वकील हैं, जिसने कानूनी रास्तों से मामले को आगे बढ़ाने की कोशिश की। हालांकि, उन्हें अब तक केस फाइल तक पहुंच नहीं दी गई है और न ही उन्हें अपने भाई का प्रतिनिधित्व करने या सजा को चुनौती देने की अनुमति दी गई है।

इस बीच, लेबनानी-ऑस्ट्रेलियाई उद्यमी मारियो नॉफल ने एक्स पर अपने सत्यापित अकाउंट से दावा किया है कि यह फांसी कई में से पहली हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरानी अधिकारी जनता को नियंत्रित करने के लिए भय का इस्तेमाल कर रहे हैं। नॉफल ने यह भी दावा किया कि मौजूदा प्रदर्शनों में अब तक 2,000 लोगों की मौत हो चुकी है, हालांकि इस आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

बता दें की ईरान में यह ताजा विरोध प्रदर्शन दिसंबर 2025 के अंत में शुरू हुए थे। इसकी जड़ में गंभीर आर्थिक संकट है, जिसमें ईरानी रियाल की तेज गिरावट, बढ़ती महंगाई और रोजमर्रा की वस्तुओं की आसमान छूती कीमतें शामिल हैं। शुरुआत में तेहरान के बाजारों से शुरू हुआ यह आंदोलन जल्द ही अन्य शहरों में फैल गया, जहां दुकानदारों, छात्रों और आम नागरिकों ने सड़कों पर उतरकर बेहतर जीवन स्थितियों और व्यापक राजनीतिक बदलाव की मांग की। खासकर ईरान पर मंडराते इस्लामी रिजीम के संकट से बाहर निकलना इन प्रदर्शनों का मुख्य लक्ष्य है।

समय के साथ, आर्थिक मांगों से शुरू हुआ यह आंदोलन अब आयतुल्ला अली खामेनेई के नेतृत्व वाले शासन को हटाने की मांग करने वाले सबसे बड़े राष्ट्रव्यापी आंदोलनों में से एक बन गया है। ऐसे में एरफान सोल्तानी को पुरे आंदोलन को दबाने के उद्देश्य बनाया गया बलि का बकरा है।

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