ईरान की इस्लामी रिजीम के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के अनुसार, उनके शरीर पर कई गंभीर चोटें आई हैं, जिनमें चेहरे और होंठों पर गंभीर जलन शामिल है, जिससे उन्हें बोलने में कठिनाई हो रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि उन्हें आगे चलकर प्लास्टिक सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है।
बताया गया है कि मोजतबा खामेनेई के एक पैर की तीन बार सर्जरी हो चुकी है और अब उन्हें कृत्रिम अंग की जरूरत है। इसके अलावा उनके एक हाथ का भी ऑपरेशन हुआ है और वह धीरे-धीरे कार्य करने की क्षमता वापस पा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, गंभीर चोटों के बावजूद वह मानसिक रूप से सक्रिय और निर्णय लेने में सक्षम हैं, लेकिन सार्वजनिक रूप से लगभग पूरी तरह से गायब हैं। उन्होंने पद संभालने के बाद से अब तक कोई सार्वजनिक संबोधन या उपस्थिति दर्ज नहीं कराई है।
सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि यह स्थिति उनकी रणनीति का हिस्सा है, क्योंकि वह इस संवेदनशील समय में खुद को कमजोर या असुरक्षित दिखाना नहीं चाहते। उनकी सुरक्षा को लेकर भी अत्यधिक सतर्कता बरती जा रही है।
संचार व्यवस्था भी काफी गोपनीय हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, उनके पास संदेश हस्तलिखित रूप में सीलबंद लिफाफों में भेजे जाते हैं, जिन्हें कारों और मोटरसाइकिलों के जरिए एक श्रृंखला के माध्यम से उनके ठिकाने तक पहुंचाया जाता है। उनके जवाब भी इसी तरीके से वापस भेजे जाते हैं।
सुरक्षा कारणों से वरिष्ठ सरकारी अधिकारी भी उनसे सीधे मिलने से बच रहे हैं। आशंका जताई जा रही है कि किसी भी तरह की गतिविधि का पता लगाकर बाहरी ताकतें हमला कर सकती हैं।
इन परिस्थितियों के बीच ईरान में सत्ता संतुलन में बदलाव देखने को मिल रहा है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर के वरिष्ठ कमांडरों का प्रभाव तेजी से बढ़ा है और वे अब युद्ध, कूटनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े फैसलों में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं।
पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद के पूर्व सलाहकार अब्दुलरेज़ा दावारी ने कहा, “मोजतबा देश को ऐसे मैनेज कर रहे हैं जैसे वे बोर्ड के डायरेक्टर हों। जनरल बोर्ड के सदस्य हैं और वे मिलकर सारे फैसले लेते हैं।”
विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति पूर्व सर्वोच्च नेता अली ख़ामेनेई के समय की अत्यधिक केंद्रीकृत व्यवस्था से अलग है, जहां अंतिम निर्णय एक ही व्यक्ति के हाथ में होता था। अब शीर्ष स्तर पर निर्णय सामूहिक रूप से लिए जा रहे हैं।
सत्ता के इस बदलाव का असर ईरान की राजनीतिक व्यवस्था पर भी पड़ा है। राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन और विदेश मंत्री अब्बास अराघची जैसे नागरिक नेता रणनीतिक मुद्दों पर सीमित भूमिका निभा रहे हैं और मुख्य रूप से आंतरिक प्रशासन तक ही सीमित हैं।
इसका सीधा असर कूटनीतिक प्रयासों पर भी पड़ा है। अमेरिका के साथ प्रस्तावित वार्ता सैन्य नेतृत्व के विरोध के चलते रद्द हो गई। बढ़ते दबाव और मतभेदों के बीच अंततः सैन्य कमांडरों का रुख हावी रहा। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रिजीम को हटाने बातें करने के बावजूद रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान की शासन व्यवस्था अब भी कायम है, लेकिन उसका स्वरूप बदल रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि ईरान की सत्ता अब एकल नेतत्व से हटकर सामूहिक सैन्य प्रभाव की ओर बढ़ रही है, जहां निर्णय प्रक्रिया अधिक गोपनीय और केंद्रीकृत से अलग स्वरूप ले रही है।
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