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Sunday, October 18, 2026
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भारत के सद्भाव से डरा ISI: तालिबानी लड़ाकों से कहा, नष्ट करो भारतीय सम्पत्तियां

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नई दिल्ली। अफगानिस्तान में भारत द्वारा बनाई गई हजारों करोड़ो की सम्पतियां अब तालिबानी लड़ाकों के निशाने पर हैं। पाकिस्तान लड़ाकों को आईएसआई ने अब भारतीय सम्पतियों को निशाना बनाने को कहा है। आईएसआई ने तालिबान में बड़ी संख्या में शामिल पाकिस्तानी लड़कों से कहा है कि अफगानिस्तान में भारत द्वारा बनाई गई संपत्तियों को नष्ट कर दो। बता दें कि भारत ने अफगानिस्तान में शिक्षा और पेयजल के साथ कई परियोजनाओं में निवेश किया है।

मालूम हो कि भारत सरकार ने पिछले दो दशकों से अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण के प्रयास में 3 बिलियन अमरीकी डॉलर से अधिक का निवेश किया है। डेलाराम और जरांज सलमा बांध के बीच 218 किलोमीटर की सड़क और अफगान संसद भवन, जिसका उद्घाटन 2015 में किया गया था, अफगान लोगों के लिए भारतीय योगदान के सबसे बड़े प्रतीक हैं। एक अनुमान और इनपुट के अनुसार, अशरफ गनी के नेतृत्व वाली अफगानिस्तान सरकार के खिलाफ तालिबान के हमले का खुलकर समर्थन करने के लिए 10,000 से अधिक पाकिस्तानियों ने अफगानिस्तान में युद्ध क्षेत्र में प्रवेश किया है। इनपुट के अनुसार, पाकिस्तानी और तालिबान लड़ाकों को विशेष निर्देश के साथ भारत द्वारा निर्मित संपत्तियों को टारगेट करने और वहां भारतीय सद्भावना के किसी भी संकेत को मिटाने के लिए भेजा गया है। अफगानिस्तान की निगरानी करने वाले सरकारी सूत्रों ने एएनआई को यह जानकारी दी है।
भारत ने अफगानिस्तान में शिक्षा के क्षेत्र में बहुत बड़ा योगदान दिया था। शिक्षकों और सहायक कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने में एक बड़ी भूमिका निभाई थी। हक्कानी नेटवर्क सहित पाकिस्तान समर्थित इस्लामिक आतंकवादी समूह वहां भारत के खिलाफ वर्षों से अत्यधिक सक्रिय हैं। भारतीय पक्ष इस मुद्दे पर भी असमंजस में है कि क्या उन्हें काबुल में अपनी उपस्थिति बनाए रखने की अनुमति दी जाएगी क्योंकि अभी तक अति-कट्टरपंथी इस्लामी समूह द्वारा कोई आश्वासन या संकेत नहीं दिया गया है, जिसे भारत के विरोध के रूप में देखा गया है। भारतीय एजेंसियां काबुल हवाईअड्डे पर भी स्थिति पर करीब से नजर रखे हुए हैं, जो अब बहुत लंबे समय तक अमेरिकी सुरक्षा में नहीं रहने वाला है। बगराम हवाई अड्डे सहित अमेरिकियों के अधीन कई हवाई क्षेत्र तालिबान के साथ चल रहे सत्ता संघर्ष के कारण खाली कर दिए गए हैं। सिविल वर्क में लगे भारतीय कामगारों को भी बाहर जाने को कहा गया है। भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी WAPCOS में बांध परियोजनाओं के लिए कुछ अधिकारी वहां थे।

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