विदेश मंत्री एस. जयशंकर 4 से 10 जनवरी 2026 तक फ्रांस और लक्ज़मबर्ग की छह दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर पहुंच चुके हैं। विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, यह दौरा बदलते वैश्विक परिदृश्य के बीच यूरोप में भारत की सक्रिय कूटनीति को रेखांकित करने और दोनों देशों के साथ द्विपक्षीय एवं रणनीतिक सहयोग को और गहराई देने पर केंद्रित रहेगा। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत निर्णायक चरण में है।
फ्रांस प्रवास के दौरान जयशंकर शीर्ष फ्रांसीसी नेतृत्व से मुलाकात कर रहें है और अपने समकक्ष विदेश मंत्री जाँ-नोएल बैरो के साथ विस्तृत वार्ता करेंगे। इन बातचीतों में भारत–फ्रांस रणनीतिक साझेदारी की प्रगति की समीक्षा के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचार किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि 26 जनवरी 1998 को शुरू हुई यह साझेदारी भारत की पहली औपचारिक रणनीतिक साझेदारी थी, जो दोनों देशों की रणनीतिक स्वायत्तता और स्वतंत्र वैश्विक दृष्टिकोण की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
कल शाम विदेश मंत्री ने पेरिस में ‘से की से ट्राम – भारत और फ्रांस के बीच बुनी हुई कहानियाँ’ प्रदर्शनी देखने गए थे। जिसे देखकर उन्होंने कहा, “यह प्रदर्शनी भारत की टेक्सटाइल विरासत, जानकारी और क्रिएटिविटी को दिखाती है। यह भारत और फ्रांस के मज़बूत सांस्कृतिक जुड़ाव की भी याद दिलाती है।”
Visited exposition ‘Ce qui se trame – woven stories between India and France’ in Paris this evening.
The exhibition showcases India’s textile heritage, savoir-faire and creativity. It is also a reminder of the strong 🇮🇳 🇫🇷 cultural connect. pic.twitter.com/sqAwWrs3sa
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) January 4, 2026
पेरिस प्रवास का एक प्रमुख कार्यक्रम 31वें फ्रेंच एंबेसडर्स कॉन्फ्रेंस में जयशंकर का मुख्य अतिथि के रूप में संबोधन होगा। इस मंच से वे वैश्विक कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर भारत के दृष्टिकोण को प्रस्तुत करेंगे, जिससे यूरोपीय रणनीतिक हलकों में भारत की भूमिका और मजबूत होने की उम्मीद है।
भारत–फ्रांस संबंधों की आधारशिला रक्षा और सुरक्षा सहयोग है, जिसमें परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष सहयोग भी शामिल है। हाल के वर्षों में यह साझेदारी इंडो-पैसिफिक आयाम तक विस्तारित हुई है। इसके अलावा समुद्री सुरक्षा, डिजिटलाइजेशन, साइबर सुरक्षा, उन्नत कंप्यूटिंग, आतंकवाद-रोधी सहयोग, जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ा है।
फ्रांस के बाद जयशंकर लक्ज़मबर्ग जाएंगे, जहां वे उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री ज़ेवियर बेटेल और अन्य वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात करेंगे। चर्चाओं में व्यापार, प्रौद्योगिकी और वित्त सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर रहेगा। इसके साथ ही जयशंकर लक्ज़मबर्ग में भारतीय समुदाय से भी संवाद करेंगे, जिससे जन-से-जन संबंधों को मजबूती मिलेगी।
भारत और लक्ज़मबर्ग के बीच 1948 से राजनयिक संबंध हैं और दोनों देशों के रिश्ते पारस्परिक विश्वास पर आधारित रहे हैं। लक्ज़मबर्ग का वैश्विक वित्तीय केंद्र के रूप में स्थान भारत के लिए निवेश और नवाचार के नए अवसर खोलता है।
रक्षा, अंतरिक्ष, फिनटेक और हरित निवेश जैसे क्षेत्रों में संभावित सहयोग इस यात्रा को रणनीतिक रूप से अहम बनाने वाला है। कुल मिलाकर, जयशंकर की यह यात्रा भारत की यूरोपीय कूटनीति को नई दिशा देने और वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति को और सुदृढ़ करने वाली मानी जा रही है।
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