भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक दौरे पर अमेरिका के लिए रवाना हो गए हैं, जहां वे वॉशिंगटन में आयोजित होने वाले क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल में हिस्सा लेंगे और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे। दौरान भारत-अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत लंबित है, टैरिफ से जुड़े मतभेद बने हुए हैं और दोनों देश रणनीतिक व आर्थिक साझेदारी को नई दिशा देने की कोशिश में जुटे हैं।
4 फरवरी को प्रस्तावित इस उच्चस्तरीय मंत्रीस्तरीय बैठक का मुख्य फोकस उन खनिजों पर होगा जो आधुनिक प्रौद्योगिकी, रक्षा उत्पादन, ऊर्जा संक्रमण और आर्थिक सुरक्षा के लिए बेहद अहम माने जाते हैं। इनमें सेमीकंडक्टर निर्माण, इलेक्ट्रिक वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों और उन्नत रक्षा तकनीकों में इस्तेमाल होने वाले दुर्लभ और महत्वपूर्ण खनिज शामिल हैं। बैठक की मेजबानी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो कर रहे हैं और इसका उद्देश्य वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं को अधिक सुरक्षित, भरोसेमंद और विविधतापूर्ण बनाना है।
जयशंकर की यह यात्रा केवल एक बहुपक्षीय मंच तक सीमित नहीं है। मंत्रीस्तरीय बैठक के इतर, उनके और रुबियो के बीच द्विपक्षीय वार्ता होने की भी उम्मीद है। व्यापार और टैरिफ से जुड़े मतभेदों के बावजूद दोनों देश रणनीतिक संवाद को जारी रखना चाहते हैं।
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर पिछले कई महीनों से बातचीत चल रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस सफलता नहीं मिली है। पिछले वर्ष कई दौर की वार्ताओं के बावजूद बाजार पहुंच और टैरिफ ढांचे जैसे मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई। ऐसे में आर्थिक असहमतियां अब भी रिश्तों पर छाया बनाए हुए हैं, हालांकि कूटनीतिक स्तर पर संपर्क कायम है।
इस दौरे का एक अहम संभावित नतीजा भारत का पैक्स सिलिका पहल में शामिल होना माना जा रहा है। यह अमेरिका के नेतृत्व में शुरू की गई पहल है, जिसका उद्देश्य सेमीकंडक्टर और उन्नत विनिर्माण जैसी महत्वपूर्ण तकनीकों के लिए सुरक्षित आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत करना है। वर्तमान में इस पहल में ब्रिटेन, जापान, इज़राइल और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश शामिल हैं। विश्लेषकों के अनुसार, यदि भारत इसमें शामिल होता है तो यह आर्थिक सुरक्षा और तकनीकी लचीलापन बढ़ाने की दिशा में एक रणनीतिक कदम होगा।
पिछले कुछ हफ्तों में जयशंकर अमेरिका के साथ संवाद को लेकर सक्रिय रहे हैं। भारत में ही उन्होंने एक अमेरिकी कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर व्यापार, सुरक्षा और महत्वपूर्ण तकनीकों पर चर्चा की थी। वॉशिंगटन यात्रा को इसी निरंतर कूटनीतिक प्रयास के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है।
कुल मिलाकर, भारत-अमेरिका संबंध एक जटिल लेकिन महत्वपूर्ण मोड़ पर हैं। क्रिटिकल मिनरल्स और तकनीकी सहयोग पर बातचीत जहां भविष्य की रणनीतिक साझेदारी को आकार दे सकती है।
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