JD वांस के इमिग्रेशन बयान पर विवाद, आलोचकों ने कहा—“पहले अपनी पत्नी उषा को ही वापस भारत भेजो”

आलोचकों का तर्क है कि वांस स्वयं उस प्रवासी सफलता मॉडल के लाभार्थी हैं जिसे वे आज कठघरे में खड़ा कर रहे हैं। उनकी पत्नी और उनका परिवार इस बात का प्रमाण है कि प्रवासी समुदाय अमेरिकी अर्थव्यवस्था और समाज में महत्वपूर्ण योगदान करते हैं।

JD वांस के इमिग्रेशन बयान पर विवाद, आलोचकों ने कहा—“पहले अपनी पत्नी उषा को ही वापस भारत भेजो”

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अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD वांस द्वारा बड़े पैमाने पर हो रहे प्रवासन को अमेरिकन ड्रीम की चोरी बताने वाले बयान ने देश में व्यापक राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। दरम्यान आलोचक वांस पर दोहरे मानदंड, ज़ेनोफोबिया और नस्ली राजनीति का आरोप लगा कर याद दिलाने में लगे है कि उनकी पत्नी उषा वांस भारतीय प्रवासियों की बेटी हैं। सोशल मीडिया पर कई प्रतिक्रियाओं में लोगों ने कटाक्ष करते हुए कहा कि अगर वांस वास्तव में अपने बयान पर अड़े हैं, तो उन्हें शुरुआत अपनी पत्नी से करनी चाहिए।

JD वांस ने X पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि, “बड़ी संख्या में इम्मीग्रेशन अमेरिकी सपने की चोरी है। यह हमेशा से ऐसा ही रहा है, और हर स्थिति पत्र, थिंक टैंक लेख, और अर्थमिति अध्ययन जो इसके विपरीत सुझाव देते हैं, उनका भुगतान पुरानी व्यवस्था से अमीर बन रहे लोगों द्वारा किया जाता है।”

इस पोस्ट पर आलोचना करते हुए लेखक वजाहत अली ने लिखा, “इसका मतलब है कि आपको उषा, उसके भारतीय परिवार और अपने द्विजातीय बच्चों को वापस भारत भेजना होगा।”

इमिग्रेशन टिप्पणी पर मचे शोर के बीच वांस की हालिया सांस्कृतिक और धार्मिक प्राथमिकताओं को लेकर की गई टिप्पणी भी विवाद का हिस्सा बन गई है। न्यूयॉर्क पोस्ट पॉडकास्ट पर उन्होंने कहा था कि अमेरिकियों के लिए अपने जैसे नस्ल, भाषा या त्वचा रंग वाले पड़ोसियों को पसंद करना पूरी तरह से उचित और स्वीकार्य है। वहीं नागरिक अधिकार संगठनों ने इस बयान को नस्ली विभाजन को बढ़ावा देने वाला बताया था।

इसके अलावा, उन्होंने पिछले महीने एक कार्यक्रम में यह भी कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि उनकी पत्नी उषा, जो हिंदू मूल की हैं, किसी दिन ईसाई धर्म अपनाएंगी। यह टिप्पणी भी कई लोगों को असंवेदनशील लगी। बाद में वांस को सफाई देनी पड़ी कि उषा कन्वर्ट होने की कोई योजना नहीं रखतीं और वे उनकी आस्था का सम्मान करते हैं।

यह विवाद ऐसे समय उभर रहा है जब ट्रंप प्रशासन ने प्रवासियों पर अपनी बड़ी कार्रवाई तेज कर दी है। 3 दिसंबर को USCIS ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए 19 उच्च जोखिम वाले देशों से आने वाले सभी इमिग्रेशन आवेदनों—ग्रीन कार्ड, नागरिकता, वीज़ा और शरण दावों—को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।

इस निर्णय से 2.2 दशलक्ष से अधिक लंबित शरण दावों पर रोक लगी है। पहले से स्वीकृत शरणार्थियों की पुनः पूछताछ शुरू हुई है। हजारों परिवारों और छात्रों के रास्ते बंद हुए है। हालांकि यह कठोर कदम वॉशिंगटन डीसी में एक अफगान शरणार्थी द्वारा नेशनल गार्ड सदस्य की हत्या के बाद उठाया गया, जिसे प्रशासन सुरक्षा विफलता के रूप में पेश कर रहा है।

JD वांस की प्रवासन संबंधी बयानबाज़ी, जिसमें चोरी जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया, विशेषज्ञों के अनुसार क्लासिक ट्रंप-शैली की राजनीति है, आर्थिक असुरक्षा को सांस्कृतिक भय में बदलना। हालाँकि विशेषज्ञ मानते हैं कि अनियंत्रित प्रवासन से कम-कौशल वाले क्षेत्रों में 5–10% तक वेतन दबाव पड़ सकता है, लेकिन इसे संपूर्ण षड्यंत्र के रूप में चित्रित करना वास्तविक तस्वीर को सरल बना देता है।

आलोचकों का तर्क है कि वांस स्वयं उस प्रवासी सफलता मॉडल के लाभार्थी हैं जिसे वे आज कठघरे में खड़ा कर रहे हैं। उनकी पत्नी और उनका परिवार इस बात का प्रमाण है कि प्रवासी समुदाय अमेरिकी अर्थव्यवस्था और समाज में महत्वपूर्ण योगदान करते हैं। शोध मानते है की अमेरिका की GDP वृद्धि का लगभग 25% हिस्सा प्रवासी पैदा करते हैं।

इसके साथ ही यह भी आशंका जताई जा रही है कि नस्ली प्राथमिकताओं जैसी टिप्पणियाँ एशियाई-अमेरिकी और हिस्पैनिक जैसे तेजी से बढ़ते मतदाता समूहों को दूर कर सकती हैं।

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