पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर कराची में रमज़ान के महीने में गंभीर गैस संकट खड़ा हो गया है। शहर के 70 प्रतिशत से अधिक इलाकों में गैस आपूर्ति लगभग ठप हो गई है, जिसके कारण रोज़ेदारों को सेहरी और इफ्तार की तैयारी में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार हालात गंभीर जान पड़ते है। शहर में गैस वितरण का जिम्मा संभालने वाली सुई सदर्न गैस कंपनी (SSGC) के नेटवर्क में गैस प्रेशर इतना कम हो गया है कि कई इलाकों में 12 से 15 घंटे तक अघोषित लोडशेडिंग हो रही है। हालांकि पाकिस्तान सरकार ने जनता को भरोसा दिया था की केवल रात के समय सीमित गैस कटौती की जाएगी।
गैस न मिलने के कारण लोग मजबूरी में महंगी एलपीजी खरीदने को विवश हो गए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक एक सिलेंडर की कीमत 3,000 से 4,000 पाकिस्तानी रुपये तक पहुंच चुकी है। पाकिस्तान के लोगों का घरेलू बजट बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुई अस्थिरता और कथित नाकेबंदी के कारण एलएनजी आयात प्रभावित हुआ है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का महत्वपूर्ण रास्ता माना जाता है और इसमें किसी भी बाधा का असर सीधे ऊर्जा बाजारों पर पड़ता है। पिछले दो सप्ताह से जारी मध्य-पूर्व युद्ध के कारण समुद्री परिवहन में व्यवधान आया है, जिससे कराची का पहले से दबाव झेल रहा गैस वितरण तंत्र और भी चरमरा गया है।
चुपचाप बदला गया सप्लाई टाइमटेबल
हालात बिगड़ने के बाद पाकिस्तानी गैस वितरण कंपनी SSGC ने बिना किसी सार्वजनिक घोषणा के गैस सप्लाई का नया टाइमटेबल लागू कर दिया है। इसके अनुसार सेहरी के समय सुबह 3:30 से 6:00 बजे तक और इफ्तार से पहले शाम 3:30 से 7:00 बजे तक गैस आपूर्ति का समय तय किया गया है। हालांकि, नागरिकों का कहना है कि इन निर्धारित घंटों में भी गैस का प्रेशर इतना कम रहता है कि सामान्य रूप से खाना पकाना लगभग असंभव हो जाता है।
कई इलाके प्रभावित
शहर के कई प्रमुख इलाके इस संकट से बुरी तरह प्रभावित हैं। क्लिफ्टन, डिफेंस हाउसिंग अथॉरिटी कराची, नॉर्थ कराची, फेडरल बी एरिया, गुलबर्ग कराची जैसे क्षेत्रों में कई दिनों से गैस बेहद कम प्रेशर में आ रही है या बिल्कुल बंद है। स्थानीय लोगों के अनुसार कभी-कभी गैस कुछ मिनटों के लिए आती है, लेकिन दबाव इतना कमजोर होता है कि चूल्हा जलाना भी मुश्किल हो जाता है।
पहले से जारी महंगाई के बीच गैस संकट ने आम परिवारों की परेशानी कई गुना बढ़ा दी है। रमज़ान के दौरान भोजन और अन्य आवश्यक वस्तुओं पर होने वाला अतिरिक्त खर्च भी लोगों के लिए चिंता का कारण बन गया है। कई घरों में लोग मजबूरी में इलेक्ट्रिक स्टोव या अन्य महंगे विकल्प अपनाने लगे हैं।
नए सप्लाई टाइमटेबल को लेकर न तो कोई आधिकारिक नोटिस जारी किया गया और न ही नागरिकों को पहले से सूचना दी गई। इससे लोगों के लिए अपने रोज़मर्रा के कामकाज की योजना बनाना मुश्किल हो गया है।
नागरिकों की बढ़ती शिकायतों के बावजूद सुई सदर्न गैस कंपनी की ओर से अब तक कोई स्पष्ट बयान जारी नहीं किया गया है, जिससे जनता में नाराज़गी और असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो कराची में संकट और गहरा सकता है।
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