भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने भी इस पर अपनी तरफ से प्रतिक्रिया दी। उनके अनुसार, योग का अभ्यास अपनी व्यक्तिगत स्थिति को ध्यान में रखकर करना चाहिए।
वहीं, बढ़ती उम्र के साथ शरीर की क्षमता और जरूरतें भी बदल जाती हैं। इस वजह से बुजुर्गों को बहुत ज्यादा आगे या पीछे झुकने वाले आसन और लंबे समय तक एक ही मुद्रा में रहने वाले अभ्यासों से बचने की सलाह दी जाती है।
योग और प्राणायाम का अभ्यास करते समय व्यक्ति की शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य स्थिति सबसे अधिक मायने रखती है। हर योग अभ्यास हर किसी के लिए सुरक्षित या सही नहीं होता है। किसी भी योग या प्राणायाम को शुरू करने से पहले उसके कॉन्ट्राइंडिकेशन्स यानी ‘किन स्थितियों में यह अभ्यास नहीं करना चाहिए’, इसे समझना अनिवार्य है। गलत अभ्यास से शरीर पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।
जैसे कि भस्त्रिका प्राणायाम करते समय प्राणायम में तेजी से और बलपूर्वक सांस ली और छोड़ी जाती है। इससे शरीर में अचानक गर्मी (ऊर्जा) बढ़ती है और रक्त संचार बहुत तेज हो जाता है। हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) वाले मरीजों में यह अभ्यास हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर को खतरनाक स्तर तक बढ़ा सकता है, जिससे चक्कर आना या अन्य गंभीर कार्डियक समस्याएं हो सकती हैं।
योग का अभ्यास हमेशा जागरूकता, सही जानकारी और उचित मार्गदर्शन के साथ ही किया जाना चाहिए। अभ्यास शुरू करने से पहले अपने शरीर की क्षमताओं और सीमाओं को समझना जरूरी है। खाली पेट या भोजन के कम से कम 3-4 घंटे बाद ही अभ्यास करें। सुबह का समय योग के लिए सबसे सर्वोत्तम माना जाता है।
