नई दिल्ली में बुधवार (20 अगस्त) को लोकसभा में ज़बरदस्त हंगामा देखने को मिला। गृह मंत्री अमित शाह ने तीन अहम विधेयक पेश किए। इन प्रस्तावित कानूनों के तहत प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री यदि किसी गंभीर मामले में 30 दिन लगातार जेल में रहते हैं, तो उन्हें स्वतः पद छोड़ना होगा।
जैसे ही संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, केंद्र शासित प्रदेश शासन (संशोधन) विधेयक और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक पेश किए गए, विपक्षी सांसद विरोध में खड़े हो गए। इस दौरान तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी समेत कई नेताओं ने विधेयकों की प्रतियां फाड़ दीं और उन्हें अमित शाह की ओर उछाल दिया। कैमरे में कागज़ के टुकड़े शाह के पास गिरते दिखाई दिए। हालांकि बनर्जी ने खुद पर लगे आरोप से इंकार किया।
विपक्ष का आरोप है कि ये कानून तानाशाही हैं और इन्हें विपक्ष शासित राज्यों की सरकारों को गिराने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। बिल पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद केसी वेनुगोपाल ने शाह पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा,
“यह विधेयक संविधान की मूल आत्मा के खिलाफ है। जब अमित शाह गुजरात के गृहमंत्री थे, तब वे गिरफ्तार हुए थे। तब क्या उन्होंने नैतिकता का पालन किया था?”
इस पर शाह ने पलटवार करते हुए कहा, “मेरे खिलाफ झूठे आरोप लगाए गए थे। मैंने गिरफ्तारी से पहले ही मंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया था और जब तक कोर्ट ने मुझे बरी नहीं किया, तब तक मैंने कोई संवैधानिक पद नहीं संभाला।” बाद में शाह ने याद दिलाया कि 2014 में सीबीआई की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में उन्हें सभी आरोपों से मुक्त कर दिया था।
विपक्ष ने इन विधेयकों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए सरकार को आड़े हाथों लिया। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि यह कानून भारत को पुलिस स्टेट में बदल देगा और इसकी तुलना उन्होंने हिटलर की गुप्त पुलिस गेस्टापो से की। वहीं, कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने इसे संविधान की मूल संरचना के लिए विनाशकारी करार दिया और आरोप लगाया कि इस कानून से केंद्रीय एजेंसियों के राजनीतिक दुरुपयोग को और बढ़ावा मिलेगा।
सरकार का कहना है कि ये विधेयक भ्रष्टाचार और अपराध के मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित करेंगे। मसौदे के मुताबिक, यदि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री किसी ऐसे मामले में गिरफ्तार होते हैं जिसमें कम से कम पाँच साल की सज़ा का प्रावधान है, तो 31वें दिन से वे स्वतः पद से हटा दिए जाएंगे। हालांकि, जेल से छूटने पर उन्हें दोबारा नियुक्त किया जा सकता है। इस कदम को हालिया घटनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है, जब दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और तमिलनाडु के मंत्री वी. सेंथिल बालाजी जेल में रहते हुए भी पद पर बने रहे।
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