शिकायत में यह भी कहा गया कि आयोग भवन में अग्नि सुरक्षा मानकों, आपातकालीन निकासी व्यवस्था, छात्रों और शिक्षण संस्थानों की सुरक्षा, आपदा प्रबंधन की तैयारियों तथा नियामक एजेंसियों और संबंधित सरकारी अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कराए। इसके साथ ही हादसे में घायल सभी छात्रों को समुचित और त्वरित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश जारी करने की मांग भी की गई।
एनएचआरसी ने अपने नोटिस में अधिकारियों को भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी ‘कोचिंग सेंटर्स के नियमन के लिए गाइडलाइंस, 2024’ का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने और इसके अनुपालन की रिपोर्ट भी आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि जिस बहुमंजिला इमारत में आग लगी थी, वहां कोचिंग सेंटर के अलावा लाइब्रेरी, एनिमेशन स्टूडियो और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी संचालित हो रहे थे। ऐसे में भवन की सुरक्षा व्यवस्था और अग्निशमन उपायों पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार ने भी इस हादसे की जांच के लिए दो सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। एसआईटी में अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और अपर पुलिस महानिदेशक (लखनऊ जोन) प्रवीण कुमार को शामिल किया गया है। टीम ने 23 जून को घटनास्थल का निरीक्षण कर आग लगने के कारणों और संभावित लापरवाही की जांच शुरू कर दी है।
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