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‘मेड इन इंडिया’ स्मार्टफोन की बिक्री दूसरी तिमाही में और भी तेज़, निर्यात में 32 प्रतिशत का उछाल!

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भारत में बने स्मार्टफोनों की मांग लगातार बढ़ रही है और अब यह देश वैश्विक मोबाइल निर्माण हब के रूप में तेजी से उभर रहा है। काउंटरप्वाइंट रिसर्च की ताज़ा ‘Make in India Tracker’ रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल–जून 2025 (Q1 FY26) तिमाही में ‘मेड इन इंडिया’ स्मार्टफोन शिपमेंट्स में सालाना आधार पर 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इस दौरान घरेलू बाजार में 8 प्रतिशत की बढ़त और निर्यात में 32 प्रतिशत की तेज़ उछाल देखने को मिली।

रिपोर्ट के मुताबिक, पहली बार Dixon Technologies देश की सबसे बड़ी स्मार्टफोन निर्माता कंपनी बनकर उभरी है, जिसने सालाना आधार पर 196 प्रतिशत की अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की। कंपनी पिछले साल छठे स्थान पर थी, लेकिन इस बार मोटोरोला, ट्रांसियन ब्रांड्स, शाओमी और रियलमी से मिले ऑर्डर्स ने इसकी स्थिति मजबूत कर दी। दूसरी ओर, Foxconn Hon Hai 71 प्रतिशत की ग्रोथ के साथ दूसरे स्थान पर रही, जहां मजबूत iPhone एक्सपोर्ट्स इसकी बड़ी वजह रहे।

इसी दौरान, Bhagwati Products Limited (BPL), जो vivo और OPPO के लिए स्मार्टफोन बनाती है, पहली बार शीर्ष पांच निर्माताओं में शामिल हुई और सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली कंपनी बन गई, जिसकी मासिक उत्पादन क्षमता 20 लाख यूनिट्स से अधिक हो गई है। वहीं, टाटा समूह ने भी घरेलू और निर्यात दोनों मांगों के चलते स्थिर प्रगति दर्ज की।

काउंटरप्वाइंट रिसर्च के सीनियर एनालिस्ट प्राचिर सिंह ने कहा कि अब भारतीय EMS (इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज) कंपनियों की भूमिका लगातार बढ़ रही है, क्योंकि वैश्विक और चीनी ब्रांड्स अपने उत्पादन को इन पर अधिक भरोसे के साथ आउटसोर्स कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “आगे चलकर भारत में EMS का परिदृश्य और विस्तृत होगा, जहां स्थानीय निर्माता सबसे बड़े लाभार्थी होंगे। सरकार की इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम और वैश्विक ODMs के साथ साझेदारी इस क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।”

गौरतलब है कि भारत ने पिछले एक दशक में मोबाइल फोन निर्माण और निर्यात दोनों में ऐतिहासिक छलांग लगाई है। संसद में पेश आंकड़ों के अनुसार, मोबाइल फोन निर्यात 2014-15 में महज़ 0.01 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 2024-25 में 2 लाख करोड़ रुपए हो गया है। उत्पादन भी इसी अवधि में 28 गुना बढ़ा है और निर्माण इकाइयों की संख्या 2014 में केवल 2 से बढ़कर 2025 में 300 से अधिक हो गई है।

इस बदलाव के पीछे केंद्र सरकार की  Production Linked Incentive (PLI), Electronics Manufacturing Clusters और SPECS प्रमुख योजनाएँ अहम रही हैं, जिनकी बदौलत भारत मोबाइल आयातक से लगभग आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ा है। साथ ही, इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में करीब 25 लाख नौकरियाँ भी सृजित हुई हैं।

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