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महाराष्ट्र: ईद-ए-मिलाद जुलूस में औरंगजेब की तस्वीर पर चढ़ाया दूध, फिर उछला विवाद !

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महाराष्ट्र में मुगल आक्रांता औरंगज़ेब को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता नज़र आ रहा है। धाराशिव में औरंगज़ेब के समर्थन में लगे नारों का वीडियो सामने आने के बाद अब अकोला से भी एक नया मामला प्रकाश में आया है। बताया जा रहा है कि अकोला शहर के तिलक रोड स्थित जूना कपड़ा बाजार चौक पर निकाले गए ईद-ए-मिलादुन्नबी जुलूस में औरंगज़ेब की तस्वीर पर दूध चढ़ाया गया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

पुलिस ने वीडियो की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों के मुताबिक, जिस तस्वीर पर दूध चढ़ाया गया, वह दरअसल बॉलीवुड फ़िल्म “तानाजी: द अनसंग वॉरियर” के पोस्टर में छपे औरंगज़ेब के किरदार की है। पुलिस ने बताया कि जुलूस वाले दिन ही ऐसे सभी पोस्टर्स को ज़ब्त कर लिया गया था और अब मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है।

 

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यह पहला मौका नहीं है जब भारत में मुगल शासकों को लेकर बहस छिड़ी हो। समय-समय पर अकबर, बाबर और औरंगज़ेब जैसे आक्रमणकारियों का महिमामंडन करना समाज विशेष की ख़ास आदत बन चूका है। जगहों के नाम बदलने के मुद्दे पर भी यह बहस के मुद्दे बन जाते है, जहां राजनीतिक दल आमने-सामने आ जाते हैं।

मुग़लों ने भारत पर आक्रमण कर भारत के लोगों को सैकड़ों सालों की गुलामी में धकेल दिया। लाखों की संख्या में लोगों का कत्लेआम, लूटपाट और जबरन धर्मांतरण को अंजाम देने वाले मुग़ल आज के दौर में उन्हीं पीड़ितों के वंशजो के नायक बन चुके है। औरंगज़ेब के शासनकाल में अनेकों भव्य हिंदू मंदिरों का विध्वंस किया गया, ग़रीब हिंदुओ पर जज़िया कर लादा गया, जिसके चलते भारी संख्या में गैर-मुसलमानों को धर्मांतरित किया गया।

इस इतिहास को जानकार उसे नकारने वाले अनेक है, इनमें से अधिकतर आज धर्मांतरित मुस्लिम है। आज औरंगजेब की सरहाना करना कट्टरता के महिमामंडन करने के समान है। यह विवाद केवल इतिहास तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान, धर्मनिरपेक्षता और राजनीतिक ध्रुवीकरण से भी गहराई से जुड़े हुए हैं।

हम जब समाज में मुग़ल आक्रांताओ के महिमामंडन की बात करतें है तो इस बात को नहीं भूलना चाहिए की, १९४७ में भारत का विभाजन करने वाली और लाखों हिंदुओ का कत्लेआम करने वाली मानसिकता भी मुग़लो से ही प्रेरणा लेकर आगे बढ़ी थी।

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