1987 में भाजपा में शामिल होने के दो साल बाद 18 नवंबर 1989 को नरेंद्र मोदी का एक लेख साधना के ‘अक्षर उपवन’ में छपा था। यह लेख गुजराती भाषा में लिखा गया था। ‘मोदी आर्काइव’ ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “साधना के ‘अक्षर उपवन’ में ‘अनिकेत’ उपनाम से लिखा गया नरेंद्र मोदी का यह विशेष लेख अयोध्या के ऐतिहासिक राम शिलान्यास (9–10 नवंबर 1989) की स्मृति को जीवंत करता है।”
उन्होंने अपने लेख ‘अनिकेत’ में लिखा, “आजाद भारत में पहली बार हिंदू विजयश्री की ओर कदम बढ़ा रहा है। 9 और 10 नवंबर 1989 हिंदू चेतना के इतिहास में गगनचुंबी स्मारक बनकर रहेंगे। अयोध्या में हुए रामशिला न्यास विधि को अनेक लोग अनेक दृष्टियों से देखेंगे।
इस लेख में लिखा गया, “हिंदुस्तान में घटी इस घटना की ओर पूरे विश्व का ध्यान केंद्रित था। राजनीतिक रूप से वोटों के लालच में जीने वाले कुछ सत्ता-भूखे भेड़िए पूरे प्रसंग की सच्चाई से आंखें मूंदकर दंगों के भय को आगे रख रहे थे। ऐसे सभी लोगों के लिए हिंदू चेतना का यह गौरवमय दिन एक पाठ बनकर रहेगा।
‘अनिकेत’ में लिखा गया, “अयोध्या की घटना स्पष्ट रूप से विराट की विजयश्री की घटना है। यह सब यूं ही नहीं हुआ है। कांग्रेस संस्कृति की अल्पसंख्यक तुष्टीकरण की राजनीति ने इस विजययात्रा में कदम-कदम पर हवन में हड्डियां डालने में कोई कसर नहीं छोड़ी। देश आजाद होने के बाद रामभक्तों ने 1947 में रामजन्मभूमि की मांग की।
इस लेख में तब की कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा गया। ‘अनिकेत’ में लिखा है, “जनजागृति के लिए जब विश्व हिंदू परिषद ने राम-जानकी रथ निकाले तो कांग्रेस सरकार ने उन्हें रोका, प्रतिबंध लगाए। संत-महंतों ने चेतावनी दी, हिंदू उग्र हुए, तब कांग्रेस सरकार को झुकना पड़ा।
उन्होंने लिखा, “राम मंदिर के लिए शिला-पूजन कार्यक्रम की बात आई। कांग्रेस सरकार ने खोखली धमकियों के साथ कहा कि ऐसा कोई कार्यक्रम नहीं होने दिया जाएगा। हिंदू अडिग रहे। कांग्रेस सरकार को फिर झुकना पड़ा। देशभर में गांव-गांव, घर-घर रामशिला पूजन कार्यक्रम हुए। कांग्रेस के कानून कागजों पर ही रह गए।
कांग्रेस पर आरोप लगाए गए कि वोट के लिए भूखी इस पार्टी ने मुसलमानों को खुश करने के लिए उछलकूद को जारी रखा। ‘अनिकेत’ में लिखा गया, “कांग्रेस ने अयोध्या में शिलाएं लाने पर प्रतिबंध लगाने की धमकी दी, पर कुछ हासिल नहीं हुआ। फिर भी उसने 9 नवंबर के कार्यक्रम को रोकने का प्रयास किया।
अयोध्या की घटनाओं का जिक्र करते हुए इस लेख में लिखा गया, “सांस्कृतिक शक्तियों के सामने राजसत्ता की पराजय की घटना है। कांग्रेस की कथित धर्मनिरपेक्षता के खोखलेपन पर सत्य का तमाचा है। 43 वर्षों की कांग्रेस संस्कृति के राजनीतिक षड्यंत्रों को उजागर करने वाला एक ऐतिहासिक सत्य है और इन सबसे भी अधिक महत्त्वपूर्ण संकेत कुछ और ही हैं।”



