अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के गाजा पट्टी पर 20-सूत्रीय शांति प्रस्ताव को इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्वीकार कर लिया है। अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि फिलिस्तीनी संगठन हमास इस प्रस्ताव पर कैसी प्रतिक्रिया देता है। क़तर और मिस्र ने हमास प्रतिनिधियों तक ट्रंप का प्रस्ताव पहुंचा दिया है और संगठन इसकी समीक्षा कर रहा है।
ट्रंप के इस प्रस्ताव का मकसद युद्ध को तुरंत समाप्त करना है। इसके तहत शर्त रखी गई है कि हमास सभी बंधकों को चाहे जीवित हों या मृत रिहा करेगा। इसके बदले में इज़राइल सभी सैन्य गतिविधियां रोक देगा और एक तय रेखा तक पीछे हटेगा। इसके अलावा, इज़राइल 250 आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदियों और 7 अक्टूबर हमले के बाद गिरफ्तार किए गए 1,700 अन्य फिलिस्तीनियों को रिहा करेगा। साथ ही गाजा में मानवीय सहायता की आपूर्ति तेज़ी से बढ़ाई जाएगी।
सबसे अहम शर्त यह है कि हमास को अपने हथियार डालने होंगे और गाजा की सत्ता छोड़नी होगी। गाजा के प्रशासन का संचालन ट्रंप की अध्यक्षता वाले एक विशेष समिति के हाथों में जाएगा। प्रस्ताव में यह भी प्रावधान है कि जो हमास सदस्य हथियार छोड़कर शांतिपूर्ण जीवन अपनाने को तैयार होंगे, उन्हें आम माफी और सुरक्षित रास्ता दिया जाएगा।
क़तर के प्रिंस मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी और मिस्र की खुफिया एजेंसी के प्रमुख हसन राशद ने हमास वार्ताकारों से मुलाकात कर यह प्रस्ताव सौंपा। एसोसिएटेड प्रेस के हवाले से बताया गया कि हमास फिलहाल इस पर “सकारात्मक नीयत से” विचार कर रहा है।
हालांकि, हमास ने पहले ही साफ किया है कि हथियार छोड़ना और गाजा की सत्ता से हटना उसके लिए “रेड लाइन” है। संगठन किसी भी ऐसे समझौते को स्वीकार नहीं करना चाहता जिसमें उसे शासन में कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भूमिका न मिले। वह फ़िलिस्तीनी प्राधिकरण या किसी अंतरराष्ट्रीय गठबंधन को सत्ता हस्तांतरण के भी खिलाफ रहा है।
नेतन्याहू ने चेतावनी दी है, “अगर हमास आपके प्रस्ताव को ठुकराता है, श्रीमान राष्ट्रपति, या दिखावे के लिए मानकर बाद में उसे विफल करने की कोशिश करता है, तो इज़राइल अपने दम पर यह काम पूरा करेगा। यह आसान तरीके से हो सकता है या कठिन तरीके से, लेकिन होगा जरूर।”
ट्रंप ने भी साफ कर दिया है कि यदि हमास इस प्रस्ताव को ठुकराता है, तो इज़राइल को उसे पूरी तरह खत्म करने के लिए उनका “पूर्ण समर्थन” मिलेगा। अब सवाल यह है कि युद्ध से कमजोर पड़े हमास क्या शर्तों को मान लेगा या एक बार फिर सख्त रुख अपनाकर प्रस्ताव को ठुकरा देगा। दुनिया की निगाहें गाजा से आने वाले इस फैसले पर टिकी हुई हैं।
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