जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निर्मला सीतारमण को वित्त मंत्रालय की ज़िम्मेदारी सौंपी थी, तब कई लोगों की भौंहें तन गई थीं। बहुतों के चेहरे पर यह सवाल साफ दिखता था कि क्या वे इस दायित्व को निभा पाएंगी। लेकिन वही निर्मला सीतारमण आज लगातार नौवीं बार देश का आम बजट पेश कर चुकी हैं, जो भारत के राजनीतिक इतिहास में एक रिकॉर्ड है। जेएनयू की छात्रा से देश की वित्त मंत्री तक का उनका सफर अपने आप में प्रेरणादायक और असाधारण है।
एक उद्यमी होने के नाते मैं बजट को बेहद बारीकी से देखता हूँ और वर्षों से नियमित रूप से इसे सुनता आया हूँ। निर्मला सीतारमण ने बजट को भारतीय परंपरा के अनुरूप लाल बही-खाते में पेश कर ‘ब्रीफकेस संस्कृति’ को पीछे छोड़ दिया। बजट के दिन वे कौन-सी साड़ी पहनती हैं, इस पर चर्चा खूब होती है, लेकिन उनके काम और उपलब्धियों पर अपेक्षित चर्चा कम ही देखने को मिलती है।
जेएनयू से अर्थशास्त्र में एमफिल करने वाली निर्मला सीतारमण जब संसद में आंकड़ों के साथ अपनी बात रखती हैं, तो उनके अध्ययन की गहराई साफ झलकती है। रक्षा मंत्री के रूप में लिए गए साहसिक निर्णय हों या वैश्विक मंदी के दौर में भारत की अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखने की चुनौती, हर भूमिका में उन्होंने अपनी कुशाग्र बुद्धि का परिचय दिया है। उन्हें सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि जमीनी आर्थिक हालात की भी सटीक समझ है।
आज प्रस्तुत बजट पर नज़र डालें तो उसमें नीति की निरंतरता और आत्मविश्वास दोनों दिखाई देते हैं। भू-राजनीतिक परिस्थितियों की समझ साफ झलकती है। एआई, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और रेयर अर्थ मिनरल्स से जुड़ी घोषणाएं इस बात का संकेत हैं कि बजट पर वैश्विक घटनाक्रम और भारत-यूरोपीय संघ के मुक्त व्यापार समझौते का प्रभाव है।
संसद में गैर-जिम्मेदार विपक्ष के बावजूद संयम और दृढ़ता के साथ अपनी बात रखने वाली निर्मला सीतारमण सही मायनों में भारतीय महिलाओं का प्रतिनिधित्व करती हैं। आज के दिखावटी दौर में उनकी सादगी मन को छूती है। सूटकेस की परंपरा तोड़कर भारतीय संस्कृति का प्रतीक बही-खाता अपनाना उनके स्वदेशी विचारों का प्रमाण है। उनकी साड़ियों की सादगी हो या संवाद की स्पष्टता, कहीं भी दिखावा नहीं दिखता।
दुनिया की सबसे शक्तिशाली महिलाओं में शामिल होने के बावजूद उनके व्यवहार में कभी भपका नहीं दिखता। मध्यमवर्गीय मूल्य आज भी उनके व्यक्तित्व में जीवित हैं। तमिलनाडु के एक मध्यमवर्गीय परिवार से निकलकर यहां तक पहुँचना उनकी यात्रा को और भी प्रेरक बनाता है।
अर्थशास्त्र में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाली निर्मला सीतारमण के पति डॉ. परकला प्रभाकर अक्सर उनकी नीतियों की आलोचना करते हैं। वैचारिक मतभेदों के बावजूद पारिवारिक और पेशेवर जीवन में उन्होंने जिस संतुलन को साधा है, वह आज की पीढ़ी के लिए आदर्श है।
एक उद्यमी के रूप में उनका निर्णायक नेतृत्व प्रभावित करता है, वहीं एक सामाजिक दृष्टि से आमजन के प्रति उनका जुड़ाव साफ दिखता है। अरुण जेटली के अस्वस्थ होने के बाद जब वित्त मंत्रालय की ज़िम्मेदारी उन्हें मिली, तब से उन्होंने यह सिद्ध किया कि वे केवल रबर स्टैंप नहीं हैं। सटीक, मुद्देसुद और जरूरत पड़ने पर आक्रामक होने वाली निर्मला सीतारमण आम लोगों को बेहद सहज और अपनी-सी लगती हैं।
उनके कार्यकाल में भारत की विकास दर, जीएसटी संग्रह में वृद्धि और वैश्विक अर्थव्यवस्था में चौथा स्थान हासिल करना बड़ी उपलब्धियाँ हैं। कभी ‘फ्रैजाइल इकोनॉमी’ कहलाने वाला भारत आज पाँच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर है। इसका श्रेय उन्हें भले ही कम मिला हो, लेकिन उन्होंने इसे पाने के लिए कभी प्रयास नहीं किया| यही उनकी सबसे बड़ी विशेषता और उनका बड़प्पन है।
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