चंडीगढ़ की विशेष एनआईए अदालत में यह पूरक आरोप पत्र पेश किया गया। अभिजोत सिंह, जो पंजाब का निवासी है, अप्रैल 2025 में इस मामले में गिरफ्तार हुआ था।
यह हमला एक सेवानिवृत्त पंजाब पुलिस अधिकारी को निशाना बनाकर किया गया था ताकि समाज में डर पैदा किया जा सके। एनआईए की जांच में पता चला कि इस साजिश को पाकिस्तान में बैठे बीकेआई आतंकवादी हरविंदर सिंह उर्फ रिंदा और अमेरिका में रहने वाले गैंगेस्टर हैप्पी पासिया ने मिलकर रचा था। पासिया ने भारत में आतंकवादियों की भर्ती की, उन्हें पैसे और हथियार के साथ विस्फोटक उपलब्ध कराए।
रिंदा और पासिया को पिछले साल मार्च में भगोड़ा घोषित किया गया था, जब रोहन मसीह और विशाल मसीह गिरफ्तार हुए थे। जांच में अभिजोत सिंह को सह-साजिशकर्ता के तौर पर चिह्नित किया गया। जांच के मुताबिक, अभिजोत दिसंबर 2023 में आर्मेनिया गया था, जहां उसे हैप्पी पासिया के गुट शमशेर शेरा ने भर्ती किया।
भारत लौटने के बाद जुलाई 2024 में उसने लक्ष्य की रेकी की और रोहन मसीह के साथ मिलकर अगस्त 2024 में हत्या की कोशिश की। इसके लिए उसे बीकेआई से विदेश से फंडिंग मिली। इसके बाद, सितंबर 2024 में रोहन और विशाल ने ग्रेनेड हमले को अंजाम दिया।
एनआईए का कहना है कि अभिजोत ने आतंकी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई। अब एजेंसी उन अन्य आरोपियों और सहयोगियों की तलाश कर रही है जो साजिश में फील्ड ऑपरेटिव्स को रसद, हथियार और सहायता मुहैया कराते थे।
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