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Friday, October 30, 2026
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“रूसी तेल खरीदने के लिए किसी की अनुमति की जरूरत नहीं”

भारत ने ऊर्जा नीति पर स्पष्ट रुख दोहराया

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भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि रूसी कच्चे तेल की खरीद को लेकर उसे किसी भी विदेशी शक्ति से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है। अधिकारियों ने कहा कि देश की ऊर्जा नीति पूरी तरह राष्ट्रीय हितों और घरेलू जरूरतों के आधार पर तय होती है, न कि बाहरी दबावों के आधार पर। सरकारी सूत्रों ने विपक्ष के उन आरोपों को खारिज किया, जिनमें कहा जा रहा था कि भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए बाहरी मंजूरी की जरूरत होती है। अधिकारियों के अनुसार यह दावा तथ्यात्मक रूप से गलत है और भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए स्वतंत्र रूप से निर्णय लेता है।

यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका ने भारतीय रिफाइनरियों को रूस से तेल खरीदने के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट दी है। यह कदम पश्चिम एशिया में Iran को लेकर बढ़ते तनाव के बीच उठाया गया है। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह छूट केवल प्रक्रियागत बाधाओं को कम करने के लिए है और इससे भारत की ऊर्जा नीति प्रभावित नहीं होती।

सरकारी अधिकारियों ने कहा कि भारत की ऊर्जा रणनीति तथाकथित “एनर्जी ट्राइलेमा” अर्थात सुलभता, उपलब्धता और स्थिरता पर आधारित है, जिसका उद्देश्य देश के नागरिकों के लिए ईंधन की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करना है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश में पेट्रोल पंपों पर ईंधन की कमी जैसी स्थिति नहीं आई है, जो भारत की ऊर्जा तैयारी की मजबूती को दर्शाता है।

अधिकारियों के अनुसार भारत के पास वर्तमान में 250 मिलियन बैरल से अधिक कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का भंडार मौजूद है। यह भंडार लगभग सात से आठ सप्ताह की आपूर्ति के बराबर है, जो रणनीतिक भंडारण केंद्रों, टैंकों, पाइपलाइनों, टर्मिनलों और समुद्री जहाजों में वितरित है।

भारत ने अपनी तेल आपूर्ति को सुरक्षित करने के लिए स्रोतों में भी व्यापक विविधता लाई है। एक दशक पहले जहां देश 27 देशों से कच्चा तेल आयात करता था, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 40 हो गई है। अधिकारियों के अनुसार इससे वैश्विक बाजार में किसी भी प्रकार की बाधा के बावजूद आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिलती है।

रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद भी भारत ने रूस से तेल आयात जारी रखा और कई मामलों में इसे बढ़ाया भी। सरकारी सूत्रों का कहना है कि यह फैसला पूरी तरह ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया था, भले ही उस समय अमेरिका और यूरोपीय देशों की ओर से आपत्तियां सामने आई थीं।

ऐतिहासिक उदाहरणों का हवाला देते हुए अधिकारियों ने बताया कि इंडिया ने अतीत में भी अमेरिकी प्रतिबंधों से जुड़े मुद्दों को व्यावहारिक तरीके से संभाला है। वर्ष 2013 में तत्कालीन सरकार ने अमेरिकी कानून राष्ट्रीय रक्षा प्राधिकरण अधिनियम धारा 1245 के तहत छूट प्राप्त करने के लिए ईरान से तेल आयात में कुछ कमी की थी। उस समय अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था कि भारत ने ईरानी कच्चे तेल की खरीद में उल्लेखनीय कमी की है।

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि भारत की ऊर्जा नीति का मूल उद्देश्य नागरिकों के लिए सस्ती और स्थिर ऊर्जा सुनिश्चित करना है। उन्होंने दोहराया कि भारत उपलब्ध किसी भी विश्वसनीय स्रोत से तेल खरीदता रहेगा और यह निर्णय केवल राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।

 

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