भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल के हालिया मॉस्को दौरे ने भारत और रूस के बीच रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और सुरक्षा सहयोग को नई मजबूती देने का संकेत दिया है। 28 मई को डोभाल ने रूस के प्रथम उपप्रधानमंत्री डेनिस मांतुरोव से मुलाकात कर दोनों देशों के बीच विभिन्न रणनीतिक क्षेत्रों में चल रहे सहयोग की समीक्षा की। इस बैठक को नई दिल्ली और मॉस्को के बीच लंबे समय से चले आ रहे ‘विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी’ को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
दौरे के दौरान अजीत डोभाल ने रूस के राष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र का भी भ्रमण किया। यह केंद्र दुनिया की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री वैलेंटिना तेरेश्कोवा के नाम पर स्थापित है। उन्होंने रूस की उन्नत अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को देखा। इनमें दुनिया के सबसे शक्तिशाली फ़ॉर स्टेज लिक्विड रॉकेट इंजन और प्रस्तावित रूसी ऑर्बिटल स्टेशन के आधार मॉड्यूल का प्रदर्शन प्रमुख रहा।
डोभाल ने रोस्कोस्मोस संयुक्त उद्योग सूचना केंद्र का भी दौरा किया, जहां रॉकेट और अंतरिक्ष उद्योग से संबंधित विशाल डेटा का विश्लेषण और निगरानी की जाती है। यही केंद्र भविष्य में रूस के प्रस्तावित ऑर्बिटल स्टेशन के संचालन और प्रबंधन का भी केंद्र बनेगा।
इस यात्रा का एक विशेष आकर्षण अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर मौजूद रूसी अंतरिक्ष यात्रियों के साथ अजीत डोभाल की सीधी बातचीत रही। वीडियो लिंक के माध्यम से हुई इस बातचीत में उन्होंने अंतरिक्ष में रहने के अनुभवों, मानव मस्तिष्क पर अंतरिक्ष के प्रभाव, स्पेसवॉक की शारीरिक चुनौतियों और भारहीनता के शुरुआती अनुभवों के बारे में सवाल पूछे।
रूसी अंतरिक्ष यात्रियों ने बताया कि भारी स्पेस सूट पहनकर सूक्ष्म गतिविधियां करना काफी कठिन होता है। उन्होंने यह भी साझा किया कि भारहीनता की स्थिति में मानव शरीर और सोचने-समझने की प्रक्रिया में कई दिलचस्प बदलाव देखने को मिलते हैं। इस दौरान डोभाल को मानव अंतरिक्ष उड़ान के शुरुआती दौर से जुड़ी एक ऐतिहासिक धरोहर, ‘यूरी गागरिन की प्रसिद्ध काली वोल्गा कार’ भी दिखाई गई।
हालांकि डोभाल का मॉस्को दौरा केवल अंतरिक्ष सहयोग तक सीमित नहीं था। उन्होंने म्यांमार के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार टिन आंग सान के साथ भी द्विपक्षीय वार्ता की। बैठक में रक्षा, सुरक्षा और क्षेत्रीय संपर्क परियोजनाओं पर चर्चा हुई। यह भारत की “नेबरहुड फर्स्ट” नीति के अनुरूप एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल मानी जा रही है। बताया गया है कि म्यांमार के NSA जुलाई में भारत में आयोजित होने वाली BIMSTEC राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक में भाग लेने के लिए नई दिल्ली आ सकते हैं।
मॉस्को में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मंच के दौरान अजीत डोभाल ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के स्पष्ट और कठोर रुख को दोहराया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में किसी भी प्रकार का दोहरा मापदंड स्वीकार नहीं किया जा सकता।
डोभाल ने जिम्मेदार देशों से आतंकवाद के प्रायोजकों का समर्थन करने और उनके खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने के बीच स्पष्ट चुनाव करने का आह्वान किया। उन्होंने वैश्विक समुद्री सुरक्षा के महत्व पर भी जोर देते हुए कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर जैसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर व्यापारिक गतिविधियां सुरक्षित और निर्बाध बनी रहनी चाहिए।
इसके अलावा उन्होंने सर्गेई शोइगु के साथ अलग से भी बैठक की, जिसमें रक्षा, सुरक्षा, ऊर्जा और आर्थिक सहयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने नई दिल्ली में आयोजित होने वाली आगामी BRICS राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बैठक को लेकर भी विचार-विमर्श किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि अजीत डोभाल का यह दौरा भारत की बहुआयामी विदेश नीति और रणनीतिक संतुलन की नीति को दर्शाता है। एक ओर भारत रूस के साथ अपने पारंपरिक संबंधों को मजबूत कर रहा है, वहीं दूसरी ओर क्षेत्रीय और वैश्विक साझेदारों के साथ सहयोग का दायरा भी बढ़ा रहा है।
मॉस्को में हुए ये संवाद न केवल भारत-रूस संबंधों की मजबूती का संकेत हैं, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि भारत तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य में रक्षा, प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष अनुसंधान और सुरक्षा सहयोग के क्षेत्रों में अपनी भूमिका को और अधिक प्रभावशाली बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
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