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Tuesday, June 23, 2026
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OBC उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा वोट बैंक,भाजपा ने किया यह दावा

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लखनऊ। यूपी 2022 में विधानसभा चुनाव को लेकर सभी पार्टियां जी तोड़ मेहनत कर रही है। यूपी में करीब 18 फीसदी मुस्लिम, 12 फीसदी जाटव और 10 फीसदी यादव हैं। बाकी जातियों में यानी 18% में सवर्ण दलित और दूसरी जातियां हैं। ऐसे में इन वोटरों में से मुस्लिम को छोड़कर बीजेपी 10 फीसद यादव पर भी अपना दावा मानकर चल रही है। अगर साल 2017 के चुनाव में वोटों के प्रतिशत पर नजर डालें तो उन चुनाव में समाजवादी पार्टी को 22 फीसदी बसपा को 18 फीसदी वोट मिले थे। बीजेपी ने साफ तौर पर दावा किया है कि पिछड़ी जातियों के 50 फीसदी वोट में से ज्यादातर वोट उनके पास ही आने है। दूसरी राजनीतिक पार्टियां भी यहीं दावा कर रही हैं कि पिछड़ी और दलित जातियों पर उनका जोर है। अनुमान के मुताबिक यूपी में सबसे बड़ा वोट बैंक पिछड़ा वर्ग का है। लगभग 52 फीसदी पिछड़ा वोट बैंक में 43 फीसदी वोट बैंक गैर-यादव बिरादरी का है, जो कभी किसी पार्टी के साथ स्थाई रूप से नहीं खड़ा रहता है।

पिछड़ा वर्ग के वोटर कभी सामूहिक तौर पर किसी पार्टी के पक्ष में भी वोटिंग नहीं करते हैं। बीजेपी ने अपनी रणनीति के तहत यूपी में यादव समुदाय से तीन जगहों पर जिला पंचायत अध्यक्ष बनाया है। सरकार में भी यादव मंत्री हैं। सरकार आने वाले दिनों में यादवों की बड़ी रैली करने जा रही है, जिसका सीधा मतलब है कि बीजेपी यादवों के वोट में पैठ करने की बड़े स्तर पर तैयारी कर रही है। अहम कड़ी जाटों को भी पार्टी संगठन में जगह दी गई है। जाट नेताओं को संगठन में उपाध्यक्ष बनाया गया है. इस तरह से यादव और जाटों को साधने की बीजेपी ने पुरजोर कोशिश की है। जैसे देश की सत्ता में काबिज होने का रास्ता यूपी से होकर जाता है। ठीक उसी तरह यूपी की सत्ता में काबिज होने का रास्ता ओबीसी वोट बैंक पर निर्भर करता है।

इस वोट बैंक के सपोर्ट के बिना कोई भी दल यूपी की सत्ता में पूर्ण बहुमत की सरकार नहीं बना सकता। केंद्र की सत्ता में भी काबिज होने के लिए किसी पार्टी के पक्ष में इस वोट बैंक के एक बड़े हिस्से का सपोर्ट होना अनिवार्य है। क्योंकि मंडल कमीशन की रिपोर्ट को मानें तो देश की कुल आबादी में ओबीसी का प्रतिनिधित्व 50 फीसदी से अधिक है। जातिगत आधार पर देखें तो ओबीसी में सबसे बड़ी कुर्मी समुदाय की है। सूबे के सोलह जिलों में कुर्मी और पटेल वोट बैंक छह से 12 फीसदी तक है। इनमें मिर्जापुर, सोनभद्र, बरेली, उन्नाव, जालौन, फतेहपुर, प्रतापगढ़, कौशांबी, इलाहाबाद, सीतापुर, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर और बस्ती जिले प्रमुख हैं। ओबीसी की मौर्या-शाक्य-सैनी और कुशवाहा जाति की आबादी वोट बैंक 7 से 10 फीसदी है।

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