पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार (8 अगस्त)को नेशनल असेंबली को जानकारी दी कि भारतीय विमानों के लिए हवाई क्षेत्र बंद करने के फैसले से पाकिस्तान एयरपोर्ट्स अथॉरिटी (PAA) को सिर्फ दो महीने से थोड़े अधिक समय में 4.1 अरब पाकिस्तानी रुपये का नुकसान हुआ है। यह कदम पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के चलते उठाया गया था।
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, 24 अप्रैल से 30 जून तक की अवधि में यह घाटा मुख्य रूप से ओवरफ्लाइंग रेवेन्यू में आया, जो पहले बताए गए 8.5 अरब रुपये से कम है। पाकिस्तान ने यह प्रतिबंध तब लगाया था जब भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया। इस कदम के बाद प्रतिदिन 100 से 150 भारतीय विमान पाकिस्तान के ऊपर से उड़ान भरना बंद हो गए, जिससे ट्रांजिट ट्रैफिक में करीब 20% की गिरावट आई।
यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान को ऐसा घाटा हुआ है। 2019 में भी इसी तरह के हवाई क्षेत्र बंदी से करीब 7.6 अरब रुपये (54 मिलियन डॉलर) का नुकसान हुआ था, जबकि उस समय 100 मिलियन डॉलर का अनुमान लगाया गया था।
नेशनल असेंबली में बयान देते हुए पाक रक्षा मंत्रालय ने कहा कि इस तरह के फैसले संघीय सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं और इन्हें ‘नोटिस टू एयरमेन’ (NOTAMs) के जरिए लागू किया जाता है। मंत्रालय ने दावा किया कि यह कदम नागरिकों की सुरक्षा, बुनियादी ढांचे की रक्षा और सैन्य योजना के लिए उठाया गया था।
गौरतलब है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना ने चौकसी बरतते हुए सीमा पार के नागरिकों को किसी भी तरह की हानि से बचाया था। मौजूदा तनाव पाकिस्तान से आए आतंकवादियों ने कश्मीर के पहलगाम में एक पर्यटक स्थल पर हमला कर 26 लोगों की हत्या करने के बाद ही उत्पन्न हुआ था।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2019 में PAA की औसत दैनिक ओवरफ्लाइट आय 5.08 लाख डॉलर थी, जो 2025 में बढ़कर 7.60 लाख डॉलर हो गई थी। ऐसे में मौजूदा बंदी से हुआ घाटा पाकिस्तानी एविएशन सेक्टर के लिए गंभीर झटका है।
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