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Saturday, January 31, 2026
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कमजोर शिक्षा व्यवस्था से जूझता पाकिस्तान, 2.62 करोड़ बच्चे स्कूल बाहर!

​पाकिस्तान की भौगोलिक स्थिति रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, प्राकृतिक संसाधन प्रचुर मात्रा में हैं और आबादी अपेक्षाकृत युवा है| 

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पाकिस्तान की कमजोर शिक्षा और कौशल प्रणाली देश की आर्थिक प्रगति में बड़ी बाधा बन रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षा व्यवस्था मानव संसाधन की क्षमता को उत्पादकता में बदलने में विफल रही है, जिसके चलते देश आर्थिक रूप से पिछड़ रहा है।

पाकिस्तान ऑब्जर्वर की रिपोर्ट में कहा गया है कि शिक्षा पर कम सार्वजनिक खर्च, पुराने पाठ्यक्रम, शिक्षकों का अपर्याप्त प्रशिक्षण, सीमित व्यावसायिक शिक्षा के विकल्प और शोध के लिए कम फंडिंग के कारण देश में कौशल की भारी कमी और युवाओं में उच्च बेरोजगारी बनी हुई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान का ह्यूमन कैपिटल इंडेक्स 0.41 है, जिसका अर्थ है कि आज जन्म लेने वाला बच्चा, पूरी शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य मिलने के बावजूद, अपनी संभावित उत्पादकता का केवल 41 प्रतिशत ही हासिल कर पाएगा।

हालांकि पाकिस्तान की भौगोलिक स्थिति रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, प्राकृतिक संसाधन प्रचुर मात्रा में हैं और आबादी अपेक्षाकृत युवा है, लेकिन ये सभी कारक अब तक सतत आर्थिक विकास में तब्दील नहीं हो सके हैं। कमजोर कौशल और कम उत्पादकता राष्ट्रीय प्रगति को लगातार सीमित कर रहे हैं।

रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तान शिक्षा पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का केवल 1.9 प्रतिशत खर्च करता है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुझाए गए 4 से 6 प्रतिशत से काफी कम है। इसके अलावा, देश में करीब 2.62 करोड़ बच्चे स्कूल से बाहर हैं।

पाठ्यक्रमों में डिजिटल कौशल, आलोचनात्मक सोच और व्यवहारिक शिक्षा पर सीमित ध्यान दिया जाता है, जिससे कार्यबल तकनीकी बदलावों के लिए तैयार नहीं हो पा रहा है। सर्वेक्षणों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि 64 प्रतिशत स्नातकों को कौशल की कमी के कारण रोजगार पाने में कठिनाई होती है, जबकि युवाओं में स्नातक बेरोजगारी दर लगभग 31 प्रतिशत आंकी गई है।

रिसर्च फंडिंग बेहद कम है, उच्च शिक्षा उद्योग की जरूरतों से कटी हुई है, और शिक्षकों की गुणवत्ता भी अपर्याप्त प्रशिक्षण तथा सीमित पेशेवर विकास के कारण प्रभावित हो रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि शिक्षकों में सतत सीखने की भागीदारी कम होने से कक्षा में पढ़ाई की गुणवत्ता भी कमजोर पड़ रही है।

इसके अलावा, अप्रेंटिसशिप और प्रशिक्षण कार्यक्रम सीमित हैं, जिसके कारण कई स्नातक रोजगार के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हो पाते। रिपोर्ट के अनुसार, 58 प्रतिशत नियोक्ताओं को उपयुक्त कर्मचारी खोजने में कठिनाई हो रही है।

रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो पाकिस्तान की जनसांख्यिकीय बढ़त एक बोझ में बदल सकती है और लाखों युवा उत्पादक रोजगार से बाहर रह जाएंगे।​ 

 
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