अमेरिका ने F-16 लड़ाकू विमानों के रडार सिस्टम के लिए 488 मिलियन डॉलर के दीर्घकालिक तकनीकी सहयोग अनुबंध को मंजूरी दी है, जिसमें पाकिस्तान भी शामिल है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह डील अमेरिकी वायुसेना द्वारा नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन को दी गई है, जो F-16 के महत्वपूर्ण रडार सिस्टम के रखरखाव और तकनीकी सहायता से जुड़ी है। यह समझौता मार्च 2036 तक लागू रहेगा और इसमें APG-66 तथा APG-68 रडार सिस्टम की इंजीनियरिंग और मेंटेनेंस शामिल है। ये रडार F-16 विमानों की ऑपरेशनल क्षमता के लिए बेहद अहम माने जाते हैं।
पाकिस्तान अमेरिकी फॉरेन मिलिट्री सेल्स (FMS) कार्यक्रम के तहत शामिल साझेदार देशों में से एक है और वह लंबे समय से अमेरिकी मूल के F-16 विमानों का उपयोग करता रहा है। ऐसे में यह तकनीकी सहयोग उसके बेड़े की क्षमता और सेवा अवधि को बनाए रखना भारत के लिए गंभीर सवाल है।
F-16 विमानों का इस्तेमाल पहले भी भारत-पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव के दौरान चर्चा में रहा है। फरवरी 2019 में बालाकोट में भारत की एयरस्ट्राइक के बाद पाकिस्तान ने भारत पर हमले में किए। इस दौरान हवाई संघर्ष में F-16 के इस्तेमाल किया गया। दौरान भारतीय विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान ने एक पाकिस्तानी F-16 को मार गिराया था।
इसके अलावा मई 2025 के भारत-पकिस्तान संघर्ष दौरान भी पाकिस्तान ने F-16 का इस्तेमाल किया था। बता दें की अमेरिका के यह लड़ाकू विमान अफ़ग़ानिस्तान में आतंकवाद के खिलाफ इस्तेमाल किए जाएंगे इसी वादे के साथ बेचे गए थे। अमेरिका की ओर से भारत को यही भरोसा दिया गया था।
इससे पहले दिसंबर 2025 में अमेरिका ने पाकिस्तान के F-16 बेड़े के लिए 686 मिलियन डॉलर के एक और अपग्रेड पैकेज का प्रस्ताव दिया था। इस पैकेज में आधुनिक एवियोनिक्स, सुरक्षित संचार प्रणाली, Link-16 डेटा क्षमताएं और प्रशिक्षण सहायता शामिल थी, जिसका उद्देश्य इन विमानों की क्षमता और आपसी समन्वय को बेहतर बनाना है।
यह अपग्रेड 2040 तक F-16 विमानों की सेवा अवधि बढ़ाने, सुरक्षा और मिशन क्षमता को मजबूत करने में मदद करेंगे। साथ ही, यह कदम भारतीय रक्षा समीकरणों और रणनीतिक संतुलन पर भी प्रभाव डाल सकता है।
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