30 C
Mumbai
Tuesday, March 17, 2026
होमदेश दुनियाIMF की शर्तें पूरी करने में जूझ रहा पाकिस्तान

IMF की शर्तें पूरी करने में जूझ रहा पाकिस्तान

बढ़ता व्यापार घाटा और महंगा तेल बना नई चुनौती

Google News Follow

Related

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। एक ओर देश को अंतरराष्ट्रीय ऋण कार्यक्रम की शर्तें पूरी करनी हैं, वहीं दूसरी ओर बढ़ता व्यापार घाटा और मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष के कारण तेल की कीमतों में आई तेजी से आर्थिक स्थिति और जटिल हो गई है। कराची की बिजनस रिकॉर्डर की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान को अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष(IMF) से मिलने वाले ऋण कार्यक्रम की शर्तों को पूरा करने में बढ़ती मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान में विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में अक्सर देरी होती है, जिससे उनकी लागत लगातार बढ़ती जाती है। इस स्थिति के पीछे क्षेत्रीय अक्षमताओं के साथ-साथ सरकार की सीमित वित्तीय क्षमता को भी जिम्मेदार बताया गया है। सीमित राजकोषीय संसाधनों के कारण सरकार कई परियोजनाओं के लिए आवश्यक धन समय पर उपलब्ध नहीं करा पाती, जिससे परियोजनाएं लटक जाती हैं और उनकी कुल लागत और बढ़ जाती है।

इसी कारण 2019 के बाद से पाकिस्तान को दिए गए ऋण कार्यक्रमों में IMF ने यह शर्त रखी है कि सरकार केवल उन्हीं सार्वजनिक क्षेत्र विकास परियोजनाओं को प्राथमिकता दे, जो लगभग पूरी होने के करीब हैं।

आर्थिक आंकड़ों के अनुसार जुलाई से जनवरी 2026 के बीच पाकिस्तान का व्यापार घाटा तेजी से बढ़ा है। इस अवधि में निर्यात में 5.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि आयात 9.8 प्रतिशत बढ़ है । इस असंतुलन के कारण चालू खाता घाटा भी बढ़कर लगभग 1.074 अरब डॉलर तक पहुंच चूका है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 564 मिलियन डॉलर का अधिशेष था।

हालांकि विदेशों में काम करने वाले पाकिस्तानियों द्वारा भेजी गई धनराशि यानी रेमिटेंस में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन उससे भी इस घाटे की भरपाई नहीं हो सकती। मध्य-पूर्व में ईरान से जुड़े संघर्ष का असर भी पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में बाधा की आशंका के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध शुरू होने के दो ही दिनों के भीतर कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो चुकी थी। चूंकि पाकिस्तान के कुल आयात में पेट्रोलियम उत्पादों की हिस्सेदारी काफी बड़ी है, इसलिए तेल महंगा होने से देश का व्यापार घाटा और बढ़ सकता है।

स्थिति तब और जटिल हो गई जब ईरान की सैन्य इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने होर्मुज जलडमरूमध्यन को बंद घोषित करते हुए जहाजों को चेतावनी दी। इसके बाद कई बड़े व्यापारिक जहाजों ने इस मार्ग से तेल की आपूर्ति रोक दी, हालांकि सीमित यातायात अभी भी जारी है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान के लिए विदेशी ऋण पर निर्भरता कम करना फिलहाल मुश्किल दिखाई देता है। चालू वित्तीय वर्ष के बजट में लगभग 20 अरब डॉलर के बाहरी वित्तपोषण का प्रावधान किया गया है।

इसके अलावा पाकिस्तान एक मात्र देश होगा, जिसके विदेशी मुद्रा भंडार का बड़ा हिस्सा भी कर्ज पर आधारित है, जिसमें तीन मित्र देशों से मिलने वाले लगभग 12 अरब डॉलर के वार्षिक रोलओवर शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पाकिस्तान को विदेशी ऋण पर निर्भरता कम करनी है, तो उसे सरकारी खर्च में कटौती और आर्थिक नीतियों में व्यापक सुधार जैसे कठिन कदम उठाने पड़ेंगे।

यह भी पढ़ें:

ट्रंप की नौसेना गठबंधन की योजना को झटका: ब्रिटेन, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने सेना भेजने से किया इनकार

पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वालों ने ब्रिटेन-मलेशिया तक भेजी भारत की संवेदनशील जानकारी

हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य बंद होने के बावजूद सऊदी अरब कैसे बेच रहा है तेल ?

National Stock Exchange

लेखक से अधिक

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

Star Housing Finance Limited

हमें फॉलो करें

151,025फैंसलाइक करें
526फॉलोवरफॉलो करें
298,000सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

अन्य लेटेस्ट खबरें