भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने योगासन को लेकर सावधानियां बरतने की हिदायत दी। उनके अनुसार, योग आमतौर पर सुरक्षित होता है, जब इसे सही तरीके से सीखा और जरूरी सावधानियों के साथ किया जाए। जबरदस्ती कोई आसन करना, अपनी क्षमता से ज्यादा देर तक सांस रोकना या सफाई की क्रियाओं को गलत तरीके से करना नुकसान पहुंचा सकता है।
इसके लिए बेहद जरूरी है कि आप अपनी शारीरिक सीमाओं को समझें, अपनी मेडिकल कंडीशन के बारे में अपने योग थेरपिस्ट को बताएं और किसी योग्य योग एक्सपर्ट या सर्टिफाइड इंस्ट्रक्टर की देखरेख में ही सही तकनीक सीखें। हमेशा जागरूकता के साथ अभ्यास करें और बताए गए नियमों का पालन करें।
सही तकनीक और सावधानियां क्यों जरूरी है – हर व्यक्ति के शरीर की बनावट और लचीलापन अलग-अलग होता है। इसलिए दूसरों को देखकर या रील्स और किताबों की नकल करके योगासन करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
पद्मासन (कमल मुद्रा) जैसे साधारण दिखने वाले आसन तक में अभ्यास को लेकर सावधानी बरतनी पड़ती है। यदि आप इस आसन को आसान समझते हैं तो यह जरूरी है कि पैरों को जांघों पर रखने के लिए कभी भी जबरदस्ती या अत्यधिक जोर न लगाएं, इससे घुटनों या टखनों में मोच आ सकती है। अगर किसी भी अभ्यासकर्ता के घुटनों, कूल्हों या टखनों में पुरानी चोट या गंभीर दर्द है, तो यह आसन न करें। पैरों को जबरदस्ती मोड़ने से लिगामेंट में चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है।
शीर्षासन और सर्वांगासन जैसे एडवांस्ड स्तर के योगासनों में तो यह सावधानी बहुत अधिक बढ़ जाती है। बिना सही तकनीक के करने से सर्वाइकल स्पाइन पर अत्यधिक दबाव पड़ता है।
अक्सर योगासनों में सावधानी बरतनी की सलाह दी जाती है, लेकिन प्राणायाम जैसी क्रियाओं को आमतौर पर सभी के लिए बहुत सुरक्षित माना जाता है।
अगर किसी भी अभ्यासकर्ता को पहले से कोई चिकित्सीय स्थिति (जैसे हृदय रोग, मिर्गी, हर्निया, या गर्भावस्था) है, तो बिना प्रमाणित योग ट्रेनर के मार्गदर्शन के कुंभक का अभ्यास बिल्कुल न करें।
योगासन और प्राणायाम के अलावा दैनिक जीवन में योगाभ्यास करने वाले अपने श्वसन मार्ग के लिए विभिन्न सफाई क्रियाओं को करने का अभ्यास भी करते हैं। यह सफाई क्रियाएं ‘नेति’ कहलाती हैं। जैसे- जल नेति एंड सूत्र नेति।
योग और षट्कर्म में नासिका मार्ग की सफाई के लिए जल नेति और सूत्र नेति को बहुत प्रभावी माना गया है, लेकिन इन्हें गलत तरीके या बिना उचित सावधानी के किया जाए, तो यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं और संक्रमण पैदा कर सकती हैं।
नल के सीधे ठंडे या बहुत गर्म पानी का, या नमक की सही मात्रा का उपयोग न करने से नाक के नाजुक ऊतकों में जलन, सूजन या संक्रमण हो सकता है। हमेशा उबला हुआ गुनगुना पानी और सही मात्रा में सेंधा/सादा नमक मिलाना चाहिए।
ऐसे ही सूत्र नेति में सूत्र को नाक के अंदर बहुत तेजी से या झटके से डालने की कोशिश करने से नाक की अंदरूनी परत छिल सकती है, खून आ सकता है या घाव हो सकता है। बिना साफ किए या बिना चिकनाई (जैसे हल्का गुनगुना पानी या तेल) लगाए सूत्र का उपयोग करने से घर्षण बढ़ता है और इंफेक्शन का खतरा होता है।
