पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब में फार्मेसी ऑफिसर पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। भर्ती परीक्षा के दौरान संगठित और हाई-टेक नकल का कथित मामला सामने आने के बाद, कोर्ट ने अगले आदेश तक 454 फार्मेसी ऑफिसर पदों के लिए नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर को होगी।
भर्ती परीक्षा 19 जुलाई को बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज, फरीदकोट के जरिए आयोजित की गई थी। परीक्षा में करीब 7 हजार उम्मीदवार शामिल हुए थे। परीक्षा फरीदकोट, कोटकपूरा और फिरोजपुर के 25 परीक्षा केंद्रों पर हुई थी। हालांकि, परीक्षा के दौरान ही हाई-टेक नकल का तरीका सामने आ गया। पंजाब पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सात मुख्य उकसाने वालों और 28 उम्मीदवारों को गिरफ्तार किया। इस कार्रवाई में 27 बैटरी से चलने वाले वायरलेस डिवाइस जब्त किए गए। यह भी आरोप है कि उम्मीदवारों को पेन कैमरा और रियल-टाइम डिक्टेशन के जरिए जवाब दिए गए थे। पुलिस के मुताबिक, इस रैकेट पर आरोप है कि उसने एग्जाम में सफलता दिलाने के लिए कैंडिडेट्स से 3.5 लाख से 13 लाख रुपये लिए थे।
जांच में पता चला कि यह रैकेट इंटर-स्टेट था। हालांकि, पंजाब सरकार शुरू से ही कहती रही है कि यह एग्जाम से पहले पेपर लीक होने का मामला नहीं है, बल्कि एग्जाम शुरू होने के बाद हाई-टेक नकल का मामला है। यह भी कहा गया कि पुलिस की शुरुआती जांच में एग्जाम अधिकारियों या किसी ‘अंदरूनी’ का कोई हाथ नहीं मिला। इस मामले ने पंजाब में राजनीतिक विवाद भी खड़ा कर दिया है। BJP, कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल ने आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधा है और आरोप लगाया है कि वह कथित पेपर लीक को ‘नकल’ का मामला बताकर कम करके दिखा रही है। विपक्ष ने मांग की है कि इस मामले में सरकार को जिम्मेदार ठहराया जाए।
इस बीच, हाई कोर्ट के स्टे के कारण इस एग्जाम के नतीजों के आधार पर मूल्यांकन, नतीजों की घोषणा और आगे की नियुक्ति प्रक्रिया फिलहाल मुश्किल में है। अब 17 सितंबर को होने वाली सुनवाई में कोर्ट इस भर्ती एग्जाम की आगे की दिशा तय करेगा।
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