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क्या पुतिन बिना गिरफ्तार हुए पहुंच पाएंगे हंगरी? ट्रंप-पुतिन मुलाकात पर उठा सवाल!

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यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के संभावित रास्ते पर चर्चा के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की प्रस्तावित बैठक अब हंगरी में होने वाली है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि, क्या पुतिन वहां तक सुरक्षित पहुंच भी पाएंगे? पुतिन के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC) ने 2023 में युद्ध अपराधों और यूक्रेनी बच्चों के अवैध अपहरण के आरोप में गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। तकनीकी रूप से, हंगरी न्यायालय की 1998 की रोम संधि का हस्ताक्षरकर्ता सदस्य है और ऐसे में उसे पुतिन को गिरफ्तार करना होगा।

हालांकि, हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बन ने हाल ही में ICC से बाहर निकलने की प्रक्रिया शुरू की है। यह प्रक्रिया एक वर्ष का समय लेती है, इसलिए अभी हंगरी पर कानूनी रूप से पुतिन की गिरफ्तारी का दायित्व बना हुआ है।

फिर भी, विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसी गिरफ्तारी की संभावना बेहद कम है। ऑर्बन लंबे समय से ट्रंप के करीबी सहयोगी हैं और रूस से भी मजबूत रिश्ते बनाए हुए हैं। बताया जा रहा है कि हंगरी ने पुतिन को सुरक्षा का आश्वासन दिया है, जैसे कि पिछले महीने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को दिया गया था, जिन पर भी युद्ध अपराधों का मामला लंबित है। ऑर्बन ने हाल ही में कहा कि “बुडापेस्ट यूरोप की एकमात्र ऐसी जगह है जहां इस तरह की बैठक संभव है।”
उनकी पार्टी 15 साल से सत्ता में है और विश्लेषक मानते हैं कि यह बैठक घरेलू आर्थिक दबावों और बढ़ती महंगाई से ध्यान हटाने का अवसर भी बन सकती है।

अगर पुतिन वास्तव में ट्रंप से मिलने हंगरी जाने का फैसला करते हैं, तो यह चार साल में उनका पहला यूरोपीय दौरा होगा। लेकिन वहां पहुंचना आसान नहीं है। यूरोपीय संघ (EU) ने रूस पर कई प्रतिबंध लगाए हैं, जिनमें रूसी विमानों के लिए सदस्य देशों के हवाई क्षेत्र में प्रवेश पर रोक भी शामिल है। तकनीकी रूप से, EU देश अपवाद बना सकते हैं, लेकिन यह राजनीतिक रूप से संवेदनशील फैसला होगा।

EU के लिए यह एक विरोधाभास की स्थिती है, अगर वे अनुमति नहीं देते तो उन पर शांति वार्ता में बाधा डालने का आरोप लग सकता है, और अगर अनुमति देते हैं, तो इसे रूस को वैधता देने के रूप में देखा जा सकता है। मॉस्को से बुडापेस्ट तक सीधा तीन घंटे का मार्ग है, लेकिन यह बेलारूस और पश्चिमी यूक्रेन से होकर गुजरता है, जो युद्ध क्षेत्र है। यहां से उड़ान भरना बेहद जोखिमभरा है।

बेलारूस-पोलैंड-स्लोवाकिया 5 घंटे का यह मार्ग भी कठिन है क्योंकि पोलैंड नाटो सदस्य है और रूस के प्रति कड़े रुख के लिए जाना जाता है। हाल ही में पोलैंड ने रूसी ड्रोन के प्रवेश पर चेतावनी दी थी कि अगर कोई रूसी विमान नाटो सीमा में दाखिल हुआ तो उसे मार गिराया जा सकता है।

सबसे व्यावहारिक मार्ग, तुर्की, ग्रीस और सर्बिया का 8 घंटे का यह रास्ता सबसे संभव माना जा रहा है। तुर्की रूस और पश्चिम दोनों से संतुलित संबंध रखता है। वहां से पुतिन मेडिटेरेनियन और एड्रियाटिक सागर पार कर मोंटेनेग्रो और सर्बिया जा सकते हैं। सर्बिया यूरोप में रूस का चंद सहयोगियों में से एक है और संभवतः इस यात्रा में बाधा नहीं डालेगा।   सूत्रों के अनुसार, अमेरिका को अपने नाटो सहयोगियों पर दबाव डालना पड़ सकता है ताकि पुतिन की उड़ान को सुरक्षित मार्ग मिल सके।

रूस ने आधिकारिक रूप से कहा है कि “बैठक से पहले कई सवालों को हल किया जाना बाकी है।” जबकि ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि हंगरी वार्ता यूक्रेन संघर्ष के “स्टॉप-वार-वेयर-वी-आर” प्रस्ताव को आगे बढ़ाने का अगला चरण हो सकती है।

यानी अगर सब कुछ योजना के अनुसार होता है, तो यह न केवल यूक्रेन युद्ध के अंत की दिशा में ऐतिहासिक कदम होगा, बल्कि यह भी दिखाएगा कि कैसे पुतिन अंतरराष्ट्रीय दबाव और प्रतिबंधों को चकमा देकर यूरोप की धरती पर उतरने की हिम्मत करते हैं।

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