पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सोनम रघुवंशी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि सोनम रघुवंशी को केवल इस आधार पर जमानत दे दी गई कि गिरफ्तारी की धारा टाइपोग्राफिकल मिस्टेक की वजह से गलत लिख दी गई थी।
इससे पहले 3 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने सोनम रघुवंशी की जमानत पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि सोनम जमानत पर पहले ही रिहा हो चुकी है। अदालत ने कहा था कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट के आदेश पर गंभीर सवाल उठते हैं, जिनकी आगे सुनवाई की आवश्यकता है।
सोनम रघुवंशी की तरफ से पेश वकील ने कहा था कि गिरफ्तारी के समय उन्हें न तो वकील मुहैया कराया गया और न ही गिरफ्तारी के स्पष्ट आधार बताए गए। पुलिस ने सिर्फ एक खाली प्रोफॉर्मा दिया था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि अगर यह मुद्दा इतना अहम था तो इसे पहले क्यों नहीं उठाया गया। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर जमानत सिर्फ तकनीकी आधार पर दी गई है, तो क्या कानून पुलिस को दोबारा गिरफ्तारी से रोकता है?
इंदौर के ट्रांसपोर्ट व्यापारी राजा रघुवंशी की हत्या के मामले में मेघालय सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में मेघालय हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें सोनम रघुवंशी को मिली जमानत को सही ठहराया गया था। सोनम पर मई 2025 में अपने पति राजा रघुवंशी की हनीमून के दौरान हत्या का मुख्य आरोपी होने का आरोप है।
