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Thursday, July 16, 2026
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जंतर-मंतर अनुमति नहीं मिली, फिर भी दिल्ली जाऊंगा: उमर अब्दुल्ला!

श्रीनगर में मीडिया से बात करते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के 'छीने गए अधिकारों' को बहाल करने के मुद्दे पर पार्टी का रुख अडिग है।

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जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को कहा कि अगर जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन की इजाजत नहीं भी मिली, तब भी वह और उनके विधायक 19 जुलाई को दिल्ली जाएंगे।

नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) ने जम्मू-कश्मीर के राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ ही, 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है।

श्रीनगर में मीडिया से बात करते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के ‘छीने गए अधिकारों’ को बहाल करने के मुद्दे पर पार्टी का रुख अडिग है। हमारे कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं होगा। डॉ. मुस्तफा कमाल भी यही चाहते थे कि हमारे अधिकार बहाल हों। 11 जुलाई को डॉ. कमाल की तबीयत बिगड़ने के बावजूद पार्टी ने तय राजनीतिक कार्यक्रमों को जारी रखने का फैसला किया।

उन्होंने कहा, “तब डॉक्टरों ने हमसे कहा था कि शायद वे बच न पाएं। उस समय भी नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने हमें निर्देश दिया था कि चाहे कुछ भी हो, हमें 12 जुलाई को जम्मू में अपना कार्यक्रम जारी रखना है। अगर हमने वह कार्यक्रम रद्द नहीं किया, तो 20 जुलाई के विरोध प्रदर्शन को रद्द करने का सवाल ही नहीं उठता।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने पार्टी नेताओं को पहले ही 19 जुलाई को नई दिल्ली के लिए रवाना होने को कह दिया है, भले ही विरोध प्रदर्शन की इजाजत न मिले। नेशनल कॉन्फ्रेंस धैर्य बनाए रखेगी और साथ ही वैकल्पिक योजनाएं भी तैयार रखेगी। हम जानते हैं कि धैर्य कैसे बनाए रखना है। हम इंतजार करेंगे, लेकिन अपनी वैकल्पिक योजना भी तैयार रखेंगे।

इसी बीच, विस्थापित कश्मीरी पंडितों के विभिन्न समूहों ने भी 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है। उनकी मांग है कि राज्य का दर्जा उन्हें फिर से बसाने (पुनर्वास) के बाद दिया जाना चाहिए, न कि उससे पहले।

वहीं, एनसी सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने कहा है कि वह एनसी के जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं होंगे।

वरिष्ठ अलगाववादी नेता और मुख्य धर्मगुरु मीरवाइज उमर फारूक ने इस कदम का स्वागत किया, लेकिन कहा कि इसमें कश्मीर मुद्दे के स्थायी समाधान की मांग भी शामिल होनी चाहिए थी।

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