रोजलिन की मक्का यात्रा से लौटते ही कुछ यूजर्स उनके पहनावे और पुरानी फोटोज को लेकर सवाल उठा रहे हैं। किसी ने पुरानी तस्वीरें डिलीट करने की सलाह दी तो किसी ने उनकी आस्था पर सवाल उठाए। यहां तक कि कुछ लोगों ने उनकी बीमारी को भी इस बहस से जोड़ दिया।
इस आलोचना पर रोजलिन ने बेहद शांत तरीके से प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, ”काश लोग थोड़े और दयालु होते। मेरे लिए कैंसर कोई कहानी या नाटक नहीं था, बल्कि जिंदगी बचाने की जंग थी। ऐसे दिन थे जब मैं बस सांस लेने और अगले दिन तक जीने की कोशिश कर रही थी। उन पलों में दुआ दिखावे के लिए नहीं, बल्कि दिल से निकली थी, क्योंकि जब शरीर जवाब दे रहा हो तब आस्था ही सहारा बनती है।”
रोजलिन ने कहा, “मेरी आस्था ने कभी मुझसे यह नहीं कहा कि मैं खुद को मिटा दूं। जब लोग मेरी बीमारी का इस्तेमाल मेरे कपड़ों या मेरी आस्था को जज करने के लिए करते हैं तो बहुत तकलीफ होती है। कैंसर से बच जाने का मतलब यह नहीं कि इंसान अपनी पहचान छोड़ दे।”
उन्होंने दो टूक कहा कि मैंने दुनिया को खुश करने के लिए दुआ नहीं मांगी थी, मैंने जीने के लिए दुआ मांगी थी।
उन्होंने आगे कहा, “मैं ट्रोलिंग से डरने वाली नहीं हूं। कैंसर जैसी बड़ी लड़ाई जीतने के बाद कुछ कमेंट्स और मैसेज मुझे तोड़ नहीं सकते। जिंदगी ने मुझे बहुत कुछ सिखा दिया है। संवेदनशीलता, इंसानियत और एक-दूसरे के प्रति सम्मान ही जिंदगी के असली मायने हैं। मेरा मानना है कि किसी के कपड़ों या आस्था पर फैसला सुनाने से पहले यह समझना जरूरी है कि वह इंसान यहां तक पहुंचने के लिए किन हालात से गुजरा होगा।”
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