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ट्रंप टैरिफ तनाव के बीच रूस ने भारत को तेल पर 5% छूट की पेशकश!

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अमेरिका और भारत के बीच बढ़ते टैरिफ विवाद के बीच रूस ने मंगलवार (19 अगस्त)को भारत को भरोसा दिलाया कि वह कच्चे तेल की आपूर्ति जारी रखेगा और इस पर 5 प्रतिशत तक की छूट भी दी जाएगी। रूस के भारत में डिप्टी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव एवगेनी ग्रिवा ने कहा, “भारतीय आयातकों के लिए रूसी क्रूड ऑयल पर लगभग 5 प्रतिशत छूट होगी, जो बातचीत के आधार पर तय होगी। यह आमतौर पर बिज़नेस-टू-बिज़नेस डायलॉग होता है, जो प्लस-माइनस 5% तक उतार-चढ़ाव करता रहता है।”

ग्रिवा ने स्पष्ट किया कि “राजनीतिक परिस्थितियों के बावजूद भारत लगभग समान स्तर पर रूसी तेल का आयात करता रहेगा।” उनके साथ मौजूद रूस के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन रोमन बाबुश्किन ने कहा कि भारत-रूस ऊर्जा सहयोग पर हमें पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा, “यह भारत के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति है, लेकिन हमें अपने रिश्तों पर विश्वास है और हमें भरोसा है कि बाहरी दबावों के बावजूद यह सहयोग जारी रहेगा।”

उधर, अमेरिका ने भारत पर रूस से तेल खरीदकर यूक्रेन युद्ध को फंड करने का आरोप लगाया है। व्हाइट हाउस के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने कहा, “भारत रूसी तेल का वैश्विक क्लियरिंगहाउस बन गया है, जो प्रतिबंधित क्रूड को उच्च मूल्य वाले निर्यात में बदल देता है और मॉस्को को ज़रूरी डॉलर उपलब्ध कराता है।”

इस आरोप के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर कुल 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिए, जिसमें रूस से तेल खरीद पर 25 प्रतिशत की अतिरिक्त पेनल्टी शामिल है। प्रेस सचिव कैरोलीन लीविट ने मंगलवार को प्रेस ब्रीफिंग में कहा, “राष्ट्रपति ने इस युद्ध को खत्म करने के लिए जबरदस्त सार्वजनिक दबाव बनाया है। उन्होंने भारत पर प्रतिबंध जैसे कदम उठाए हैं ताकि रूस पर द्वितीयक दबाव डाला जा सके। वह साफ कर चुके हैं कि वे इस युद्ध को जल्द से जल्द समाप्त करना चाहते हैं।”

भारत ने इन अमेरिकी टैरिफ को अनुचित, अन्यायपूर्ण और अव्यावहारिक बताया है और कहा है कि यह कदम भारतीय निर्यात क्षेत्रों जैसे वस्त्र, समुद्री उत्पाद और चमड़ा उद्योग पर गहरा असर डालेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पहले स्पष्ट कर दिया था कि नई दिल्ली किसी भी तरह के आर्थिक दबाव के आगे झुकेगा नहीं।

ज्ञात हो कि अमेरिका पहले ही रूस और उन देशों को चेतावनी दे चुका है जो उसका तेल खरीदते हैं। चीन और भारत आज रूस के सबसे बड़े क्रूड आयातक देश हैं। ऐसे में रूस का यह भरोसा और छूट की पेशकश भारत को कुछ राहत देती दिख रही है।

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