रूस ने भारत में उन्नत T-90MS बैटल टैंक के उत्पादन का दिया प्रस्ताव

रूस ने भारत में उन्नत T-90MS बैटल टैंक के उत्पादन का दिया प्रस्ताव

Russia offers to produce advanced T-90MS battle tank in India

भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग को नई गति देने के संकेत मिले हैं। रूसी सरकारी निर्यात एजेंसी रोसोबोरोनएक्सपोर्ट ने भारत में अत्याधुनिक T-90MS मुख्य बैटल टैंक के लाइसेंस प्राप्त उत्पादन की पेशकश की है। यह प्रस्ताव 15 फरवरी 2001 को हस्ताक्षरित ऐतिहासिक T-90 समझौते की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर सामने आया है।

रूस का कहना है कि भारत में पहले से T-90MS वैरिएंट का उत्पादन, असेंबली करने वाली मौजूदा सुविधाओं का उपयोग कर उन्नत T-90MS का निर्माण अपेक्षाकृत तेज़ी से शुरू किया जा सकता है। भारत में कई स्थानीय कलपुर्ज़ों और गोला-बारूद का बड़े पैमाने पर उत्पादन पहले से हो रहा है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला को मज़बूती मिल सकती है।

2001 में भारत के रक्षा मंत्रालय और रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के बीच हुए मूल अनुबंध के तहत पूरी तरह निर्मित T-90MS टैंकों के साथ-साथ सेमी-नॉक्ड-डाउन और कम्प्लीटली-नॉक्ड-डाउन किट्स की आपूर्ति शामिल थी, ताकि भारत में स्थानीय असेंबली शुरू की जा सके। 1999 में थार रेगिस्तान में तीन प्रोटोटाइप टैंकों का 2,000 किमी से अधिक दूरी तक कठोर परीक्षण किया गया था, जिसमें अत्यधिक तापमान और विविध भूभाग पर प्रदर्शन के साथ फील्ड में इंजन हटाने जैसे प्रदर्शन भी किए गए। उस समय रूस का रक्षा उद्योग वित्तीय चुनौतियों से जूझ रहा था और यह सौदा उसके लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ।

वर्ष 2019 में भारत ने ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत 464 T-90MS टैंकों के लाइसेंस उत्पादन के लिए 2.8 अरब डॉलर के समझौते को मंज़ूरी दी थी, जो स्वदेशीकरण की दिशा में बड़ा कदम माना गया। हालांकि, हालिया रूसी प्रस्ताव के बाद कोई नया अनुबंध औपचारिक रूप से घोषित नहीं हुआ है। रोसोबोरोनएक्सपोर्ट ने बयान में हेवी वेहिकल्स फैक्टरी और आर्म्ड वेहिकल निगम लिमिटेड(एवीएनएल) की यूनिट्स में अपग्रेड सहयोग के लिए तत्परता जताई है।

T-90MS भारतीय सेना के मौजूदा T-90S ‘भीष्म’ टैंकों की तुलना में व्यापक अपग्रेड प्रदान करता है। इसमें ‘कालिना’ फायर कंट्रोल सिस्टम, 125 मिमी 2A46M-5 स्मूथबोर गन, 1,130 हॉर्सपावर का V-92S2F इंजन, और ‘रिलिक्ट’ एक्सप्लोसिव रिएक्टिव आर्मर जैसी आधुनिक क्षमताएँ शामिल हैं। यह टैंक 70 किमी प्रति घंटे की अधिकतम गति और लगभग 550 किमी की सड़क रेंज प्रदान करता है। बेहतर थर्मल इमेजिंग, हंटर-किलर क्षमता और 360-डिग्री कैमरा प्रणाली से इसकी मारक क्षमता और जीवित रहने की क्षमता में वृद्धि होती है।

भारत के पास T-90 ‘भीष्म’ श्रृंखला के 1,000 से अधिक टैंक हैं, जो उसकी बख़्तरबंद क्षमता की रीढ़ माने जाते हैं। उत्पादन मुख्य रूप से अवाड़ी स्थित फैक्ट्री में केंद्रित रहा है और हाल के वर्षों में एमके-III संस्करण की आपूर्ति भी जारी रही है। परिचालन उपलब्धता दर 850–900 टैंकों के बीच आंकी जाती है, जो रखरखाव और आपूर्ति कारकों पर निर्भर करती है।

भू-राजनीतिक संदर्भ में यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब रूस अपने पारंपरिक निर्यात बाज़ारों को बनाए रखने का प्रयास कर रहा है। भारत के लिए यह पहल भविष्य की मुख्य बैटल टैंक आवश्यकताओं के लिए एक अंतरिम समाधान के रूप में देखी जा सकती है, जो स्वदेशी परियोजनाओं को पूरक करते हुए सामरिक प्रतिरोध क्षमता को सुदृढ़ कर सकती है। फिलहाल वार्ता की कोई समयसीमा घोषित नहीं हुई है और प्रस्ताव प्रारंभिक चरण में है।

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