दिल्ली में एक रूसी महिला और उसके साढ़े चार साल के बेटे के रहस्यमय ढंग से लापता होने के मामले ने राजनयिक हलकों और सुप्रीम कोर्ट में हलचल मचा दी है। महिला ने एक भारतीय नागरिक से शादी की थी और 2019 से भारत में रह रही थी। 7 जुलाई से दोनों का कोई पता नहीं है। इससे पहले, 4 जुलाई को महिला को अपने बेटे के साथ रूसी दूतावास के पीछे के दरवाजे से प्रवेश करते हुए देखा गया था। यह दावा उसके पति ने किया है, जो इस समय बेटे की कस्टडी के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर चुके हैं।
महिला के पति ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उनकी पत्नी का संबंध रूसी दूतावास के एक राजनयिक से है और वहीं से वह बेटे के साथ गायब हो गई। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की, जो कि अदालत के निर्देशों की अवहेलना है। इस मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 17 जुलाई को केंद्र सरकार को आदेश दिया कि महिला के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया जाए और सभी हवाई अड्डों, बंदरगाहों और इमिग्रेशन अधिकारियों को सतर्क किया जाए ताकि महिला और बच्चा देश से बाहर न जा सकें।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि महिला का पासपोर्ट तत्काल जब्त किया जाए। कोर्ट ने कहा कि चूंकि यह मामला राजनयिक संबंधों और वियना कन्वेंशन जैसे अंतरराष्ट्रीय समझौतों से जुड़ा है, इसलिए दूतावास अधिकारियों के खिलाफ सीधे आदेश नहीं दिए जा सकते। फिर भी अदालत ने स्पष्ट चेतावनी दी,“अगर पुलिस जांच में यह पाया जाता है कि किसी राजनयिक ने भारतीय कानूनों के तहत कोई अपराध किया है, तो कानून अपना रास्ता खुद तय करेगा।”
सुप्रीम कोर्ट ने रूसी दूतावास से भी सहयोग की अपील की है। अदालत ने कहा कि भारतीय एजेंसियों, खासकर दिल्ली पुलिस, को आदेशों का पालन करवाने में दूतावास को पूरी मदद करनी चाहिए। कोर्ट ने महिला के वकील को भी फटकार लगाई, क्योंकि उन्होंने महिला की लोकेशन को लेकर अस्पष्ट और भ्रमित करने वाली जानकारी दी।
सुप्रीम कोर्ट में चल रही कस्टडी सुनवाई के तहत पहले आदेश दिया गया था कि बच्चा दिन में 20 घंटे पिता के साथ रहेगा और 4 घंटे मां के साथ। बाद में आदेश संशोधित कर तीन दिन मां और चार दिन पिता के पास रखने की व्यवस्था की गई। महिला X-1 वीजा पर भारत में रह रही थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट समय-समय पर बढ़ाता रहा है। 22 मई को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को दोनों माता-पिता के निवास पर निगरानी रखने का निर्देश दिया था, लेकिन उसके बावजूद महिला और बच्चा लापता हो गए।
अब अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 18 जुलाई को तय की है। तब तक सभी एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि वे महिला और बच्चे की खोज में पूरी तरह सक्रिय रहें और अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करने से पहले उन्हें रोका जाए। यह मामला अब सिर्फ एक पारिवारिक विवाद नहीं, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय राजनयिक विवाद की दिशा में बढ़ता प्रतीत हो रहा है। अदालत ने यह साफ कर दिया है कि यदि किसी राजनयिक की भूमिका पाई जाती है, तो राजनयिक छूट के बावजूद कार्रवाई की जाएगी। अब नजरें 18 जुलाई की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां हो सकता है कि इस रहस्यमय लापता मामले की और परतें खुलें।
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