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सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस से परेशान? गर्दन दर्द और अकड़न दूर करने में कारगर योगासन

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सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस एक ऐसी शारीरिक समस्या है, जो उम्र बढ़ने, गलत पोस्चर, लंबे समय तक कंप्यूटर या मोबाइल के इस्तेमाल, चोट या डिस्क के घिसने की वजह से होती है। इसमें गर्दन की हड्डियों और डिस्क में घिसाव होता है, जिससे गर्दन में दर्द, अकड़न, कंधों, हाथों में झुनझुनी, सिरदर्द, चक्कर और कभी-कभी कमजोरी महसूस होती है। योगासन के पास इन समस्याओं का समाधान है।

मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा के अनुसार, नियमित योगाभ्यास से गर्दन की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, लचीलापन बढ़ता है, रक्त संचार बेहतर होता है और दर्द-तनाव में काफी राहत मिलती है। योग दवाओं का सहायक विकल्प बनकर समस्या को प्राकृतिक रूप से नियंत्रित करने में मदद करता है।

सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस के लिए मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा द्वारा सुझाए योगासन और प्राणायाम हैं, जिन्हें दिनचर्या में शामिल कर राहत पाई जा सकती है। इसमें ग्रीवा शक्ति विकासक है, जो गर्दन की मांसपेशियों को मजबूत और लचीला बनाता है, दर्द कम करता है। स्कंध, बाहुमूल शक्ति विकासक है, जो कंधे और गर्दन के जोड़ों को मजबूती देकर अकड़न दूर करता है। ताड़ासन पूरी रीढ़ सीधी करता है, मुद्रा सुधारता है और गर्दन पर दबाव कम करता है।

इसमें मार्जरी आसन और गोमुखासन भी शामिल है, जो रीढ़ को लचीला बनाता है, गर्दन और पीठ की मांसपेशियां स्ट्रेच होती हैं और जकड़न दूर कर राहत देता है। इसके अलावा, सरल भुजंगासन है, जो गर्दन और ऊपरी पीठ को मजबूत करता है, आगे झुकने की समस्या सुधारता है। मकरासन, नाड़ी शोधन प्राणायाम, भ्रामरी प्राणायाम, योग निद्रा जैसे योगासन शामिल हैं, ये पूरे शरीर-मन को रिलैक्स करते हैं और दर्द कम करने में सहायक हैं।

इन योगासन को दिनचर्या में शामिल कर मानसिक शांति मिलती है, गर्दन से जुड़े तनाव कम होते हैं और गर्दन की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, डिस्क पर दबाव कम होता है और रक्त प्रवाह बेहतर होने से सूजन-दर्द में कमी आती है। नियमित अभ्यास से पूरे शरीर को कई लाभ मिलते हैं।

योग से सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस में काफी राहत मिल सकती है, लेकिन याद रखें कि यह पूरा इलाज नहीं है। इसके लिए डॉक्टरी सलाह लें। इस दौरान सावधानियां बरतनी भी जरूरी है। योग शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग विशेषज्ञ से सलाह लें, खासकर अगर दर्द तेज है या सर्जरी हुई हो। आसन धीरे-धीरे, बिना जोर लगाए करें। गर्दन को कभी भी ज्यादा झुकाएं या घुमाएं नहीं। गर्भावस्था, हाई ब्लड प्रेशर या अन्य गंभीर शारीरिक समस्या में विशेष सावधानी बरतें।

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