इन फैसलों ने राज्य के राजनीतिक हलकों में चर्चा छेड़ दी है। हाल के विधानसभा चुनावों में पार्टी की करारी हार के बाद टीएमसी के भीतर बगावत के स्वर तेज हुए थे। कई बागी नेताओं ने अभिषेक बनर्जी की कॉरपोरेट शैली की कार्यप्रणाली और आई-पैक (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) पर अत्यधिक निर्भरता को हार की बड़ी वजह बताया था।
हालांकि कुणाल घोष ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में इन फैसलों का सीधे तौर पर उल्लेख नहीं किया, लेकिन उन्होंने पार्टी नेतृत्व के कुछ निर्णयों पर असहमति और निराशा जाहिर की।
उन्होंने लिखा कि वह ममता बनर्जी द्वारा दिए गए चुनाव चिन्ह पर जीतकर विधायक बने हैं और राज्य चुनाव के महज एक महीने के भीतर कुछ नेताओं और विधायकों द्वारा निजी स्वार्थों के लिए पार्टी और ममता बनर्जी के साथ किए गए विश्वासघात का समर्थन नहीं करते।
कुणाल घोष ने कहा, “लेकिन अगर पार्टी की गलतियों को सुधारने के बजाय विभिन्न स्तरों पर वही गलतियां दोहराई जाती रहें, तो मैं उस पर आंखें बंद नहीं कर सकता। पश्चिम बंगाल के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता, छात्र और युवा लगातार संपर्क कर रहे हैं और अपनी बातें रख रहे हैं। हमने उन्हें सुनने का आश्वासन दिया है। मैं उनसे मुलाकात करूंगा और आगे क्या करना है, यह बाद में तय होगा।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह अब भी ममता बनर्जी के साथ हैं, लेकिन पार्टी द्वारा लगातार की जा रही गलतियों का समर्थन नहीं करते।
अपने पोस्ट के अंत में उन्होंने लिखा, “मैं विश्वासघात और विश्वासघात करने वालों के साथ नहीं हूं, लेकिन मैं अपने कान, आंख, दिमाग, दिल और मुंह सब खुले रखकर पार्टी के अंदर और बाहर की परिस्थितियों पर नजर बनाए हुए हूं।”
कुणाल घोष की इस टिप्पणी को तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी असंतोष और संगठनात्मक फैसलों को लेकर बढ़ती नाराजगी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
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