संयुक्त राष्ट्र महासभा में एस. जयशंकर की कई देशों के विदेश मंत्रियों से मुलाकात!

आपसी रिश्तों को मजबूत करने पर जोर

संयुक्त राष्ट्र महासभा में एस. जयशंकर की कई देशों के विदेश मंत्रियों से मुलाकात!

S. Jaishankar Meets Foreign Ministers at UNGA to Strengthen Bilateral and Multilateral Ties

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्च स्तरीय सत्र के दौरान कई देशों के विदेश मंत्रियों से मुलाकात की और आपसी संबंधों को मजबूत करने तथा वैश्विक दृष्टिकोण समझने पर जोर दिया। जयशंकर ने ब्रिक्स, IBSA और सीईएलएसी समूहों की बैठकों में भी भाग लिया। इन बहुपक्षीय बैठकों में व्यापार, वैश्विक चुनौतियों और बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई।

द्विपक्षीय बातचीत

जयशंकर ने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मुलाकात कर द्विपक्षीय संबंधों, यूक्रेन संकट और पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा की। वहीं, संयुक्त अरब अमीरात के उपप्रधानमंत्री अब्दुल्ला बिन जायद अल नहयान से दोनों देशों के सहयोग और आगामी संयुक्त आयोग बैठक की तैयारियों पर बातचीत की। जयशंकर ने बताया कि UAE प्रतिनिधि के विचार वर्तमान वैश्विक परिदृश्य पर उपयोगी रहे।

ऑस्ट्रिया की विदेश मंत्री बीट माइनल-राइजिंगर ने मुलाकात के बाद जयशंकर का धन्यवाद किया और कहा कि भारत-ऑस्ट्रिया साझेदारी को मजबूत करना यूरोप के लिए भी लाभकारी होगा। दोनों पक्षों ने भारत और यूरोप के सामने मौजूद चुनौतियों और अवसरों पर भी गहन विचार-विमर्श किया। इसके अलावा जयशंकर ने एंटीगुआ-बारबुडा, उरुग्वे, इंडोनेशिया, सिएरा लियोन और रोमानिया के विदेश मंत्रियों से भी मुलाकात की।

भारत-सीईएलएसी सहयोग

भारत-सीईएलएसी बैठक में जयशंकर ने कोलंबिया की विदेश मंत्री रोजा योलांडा विलाविसेनियो के साथ सह-अध्यक्षता निभाई। उन्होंने “वैश्विक दक्षिण की आवाज का बेहतर प्रतिनिधित्व करने के लिए बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार की तत्काल आवश्यकता” पर सहमति व्यक्त की।

बैठक में कृषि, व्यापार, स्वास्थ्य, डिजिटल तकनीक, आपदा राहत और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। इसके अलावा, एआई, प्रौद्योगिकी, महत्वपूर्ण खनिज, अंतरिक्ष और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे उभरते क्षेत्रों में भी सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

एस. जयशंकर की ये गतिविधियां भारत की विदेश नीति में बहुपक्षीय सहयोग और वैश्विक नेतृत्व को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं। उन्होंने यह संदेश भी दिया कि भारत वैश्विक चुनौतियों और अवसरों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रतिबद्ध है।

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