अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ तस्करी के खिलाफ कार्रवाई में बड़ी सफलता मिली है। दाऊद इब्राहिम गिरोह का सदस्य और कुख्यात ड्रग तस्कर सलीम डोला को मंगलवार (28 अप्रैल) भारत वापस लाया गया। भारतीय खुफिया एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के बीच सफल समन्वय के बाद, उसे मंगलवार(28 अप्रैल) तड़के एक विशेष विमान से दिल्ली एयरपोर्ट लाया गया।
तुर्की के इस्तांबुल में उसकी गिरफ्तारी के अगले ही दिन यह कार्रवाई की गई। उसकी प्रत्यर्पण को अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि आरोप है कि वह विदेश से ‘डी-कंपनी’ के ड्रग ऑपरेशनों का बड़ा हिस्सा संचालित करता था। बताया जाता है कि उसका कार्टेल हर साल 5,000 करोड़ रुपये से अधिक के मादक पदार्थों का कारोबार करता था, हालांकि इस अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट की कुल कमाई का सटीक अनुमान उपलब्ध नहीं है।
दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचते ही वरिष्ठ खुफिया अधिकारियों ने डोला को विस्तृत पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया। जानकारी के अनुसार, केंद्रीय एजेंसियों द्वारा प्रारंभिक पूछताछ के बाद उसे आगे की कानूनी कार्रवाई और उसके व्यापक नेटवर्क की जांच के लिए मुंबई पुलिस या नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) को सौंपा जा सकता है।
सलीम डोला का प्रत्यर्पण भारतीय एजेंसियों की लगातार मिल रही बड़ी कानूनी सफलताओं की कड़ी में एक और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसकी शुरुआत जून 2025 में संयुक्त अरब अमीरात से उसके बेटे ताहेर डोला के सफल प्रत्यर्पण से हुई थी।
इसके कुछ महीनों बाद, डोला के नेटवर्क के एक अहम सहयोगी सलीम मोहम्मद सोहेल शेख को दुबई से निर्वासित किया गया, जिसके बाद मुंबई की एंटी-नारकोटिक्स टीम ने उसे भी गिरफ्तार कर लिया। इन कार्रवाइयों से यह स्पष्ट होता है कि इस संगठन के खिलाफ शिकंजा कसता जा रहा है, जिस पर भारत में बड़े पैमाने पर मादक पदार्थों के उत्पादन, अंतरराष्ट्रीय तस्करी और अन्य आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप हैं।
ड्रग तस्करी के मामलों के अलावा, सलीम डोला और उसके सहयोगी प्रवर्तन निदेशालय (ED) की भी कड़ी निगरानी में हैं, जो उनके अवैध कारोबार से जुड़े कई मनी लॉन्ड्रिंग मामलों की जांच कर रहा है।
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